प्रदेश में ई-व्हीकल खरीदने वाले 3000 से ज्यादा लोगों को 3 साल से सब्सिडी नहीं मिली है। सरकार को चाहिए कि वह ईवी नीति के 'सिस्टम' की बैटरी को ठीक से चार्ज करे।
प्रदेश में सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2022 (संशोधित 2025) लागू कर रखी है। इसका मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के साथ ही पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता को कम करना है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों यानी कि ईवी को बढ़ावा देना है। ईवी दोनों उद्देश्यों पर खरे उतरते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार की ईवी नीति के तहत 2027 तक जो नए वाहन सड़कों पर उतरेंगे, उनमें से 15 प्रतिशत वाहन ईवी होंगे। लोगों को ईवी की ओर आकर्षित करने के लिए सरकार रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन टैक्स में शत-प्रतिशत छूट दे रही है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को सब्सिडी भी दे रही है।
सब्सिडी सहित विभिन्न लुभावनी छूट का असर ये हुआ कि ईवी में बैटरी चार्जिंग समेत अन्य कई कमियां व समस्या होने के बावजूद प्रदेश में लोगों ने इसे खरीदा और चला भी रहे हैं। हाल ही में ईरान युद्ध की वजह से जो पेट्रोल-डीजल की कमी और दाम बढ़ने जैसी परिस्थितियां लोगों के सामने आईं, तो जिन्होंने ईवी खरीदा, उन्हें अपने सही निर्णय लेने पर खुशी हुई।
लेकिन, ईवी का उपयोग करने वालों की इस खुशी की बैटरी को सिस्टम ठीक से चार्ज नहीं होने दे रहा है यानी कि ईवी खरीदने वालों को सब्सिडी की राशि के लिए भटकना पड़ रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक सब्सिडी के लिए परिवहन विभाग और मंत्रालय में लोग चक्कर लगा रहे हैं, क्योंकि करीबन तीन साल हो गए उन्हें ईवी की सब्सिडी राशि नहीं मिल सकी है। ऐसे ईवी दोपहिया-चारपहिया धारकों की संख्या रायपुर जिले में 700 तो पूरे प्रदेश में 3000 से ज्यादा बताई जाती है। वहीं, परिवहन विभाग इतने दिनों से सिर्फ कागजी प्रक्रिया में लगा हुआ है। सरकार को चाहिए कि वह ईवी नीति के 'सिस्टम' की बैटरी को ठीक से चार्ज करे।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com