ओपिनियन

शहर केवल बढ़ें ही नहीं, बल्कि बेहतर ढंग से विकसित हों

स्थानीय निकायों को अपनी आय बढ़ाने के लिए संपत्ति कर, लाइसेंस, पार्किंग, विज्ञापन, उपयोगकर्ता शुल्क और अन्य वैध राजस्व स्रोतों को आधुनिक तकनीक से मजबूत करना चाहिए।
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Sep 25, 2026
smart cities
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' की सोच देश के सामने रखी थी। वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा को साकार करते हुए राजस्थान में हाल में हुए नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने 309 नगरीय निकायों में से सर्वाधिक 200 से ज्यादा जगहों पर बोर्ड बनाकर सफलता प्राप्त की है। इस परिणाम को राज्य के शहरी मतदाता की अपेक्षाओं और बदलती प्राथमिकताओं के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। नगरीय निकाय चुनावों से पहले भाजपा ने संकल्प पत्र के माध्यम से शहरों के समग्र विकास का स्पष्ट रोडमैप जनता के सामने रखा है।
अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि संकल्प पत्र में किए प्रत्येक वादे को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारते हुए जनता की कसौटी पर खरा उतरे। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत की शहरी आबादी करीब 35.7त्न है। इसके बावजूद शहरों में अनियोजित विकास, जलभराव, अवैध कॉलोनियां, खराब सड़कें और कमजोर बुनियादी ढांचा आम शहरी नागरिक के लिए चुनौती बने हुए हैं। इस ओर सरकार को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

असल में स्मार्ट सिटी वह है, जहां नागरिकों को सुरक्षित सड़कें, भरोसेमंद पानी सीवेज व्यवस्था, प्रभावी कचरा प्रबंधन, सुगम यातायात और सुरक्षित सार्वजनिक स्थान मिलें। सिर्फ बड़े प्रोजेक्ट और स्मार्ट सिटी का नाम देने से शहर स्मार्ट नहीं बनेंगे। अनियोजित शहरीकरण के कारण प्राकृतिक संपदा को हो रहे नुकसान पर जापान के क्यूशु विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार भारत के आठ बड़े शहरों के विस्तार से करीब 210 करोड़ रुपए की प्राकृतिक संपदा नष्ट हुई, जिसमें जंगल, घास के मैदान और वेटलैंड्स शामिल हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में हर सप्ताह पेरिस के बराबर निर्माण हो रहा है। तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल न केवल प्रकृति को नुकसान पहुंचा रहे हैं बल्कि प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संकट की चुनौतियों को भी बढ़ा रहे हैं।

राजस्थान आज तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। व्यापार, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रियल एस्टेट, परिवहन, छोटे व्यवसाय और सेवा क्षेत्र का विस्तार शहरों के माध्यम से ही होता है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अब नगर निकायों को स्थानीय अर्थव्यवस्था के विकास, निवेश को आकर्षित करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने वाली संस्थाओं के रूप में विकसित करना होगा। सड़क किनारे रेहड़ी लगाने वाला व्यक्ति, छोटी दुकान चलाने वाला व्यापारी, ऑटो चालक, टैक्सी चालक, कारीगर, घरेलू उद्योग, होटल, रेस्टोरेंट और सेवा क्षेत्र से जुड़े लाखों लोग शहर की अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। इसलिए शहरी विकास की किसी भी नीति में इन्हें केवल अतिक्रमण की समस्या के रूप में देखने के बजाय स्थानीय अर्थव्यवस्था के हिस्से के रूप में देखना होगा।

राजस्थान के शहरों में सीमा विस्तार के साथ नए आवासीय क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं समय पर पहुंचाना आवश्यक है। यदि शहर का विस्तार बिना नियोजन के होता रहा तो भविष्य में यातायात, जल संकट, सीवरेज और प्रदूषण की समस्याएं और गंभीर होंगी। इसलिए मास्टर प्लान आधारित विकास, जीआइएस आधारित भूमि प्रबंधन, डिजिटल रिकॉर्ड और वैज्ञानिक शहरी नियोजन को प्राथमिकता देनी होगी। स्थानीय निकायों को अपनी आय बढ़ाने के लिए संपत्ति कर, लाइसेंस, पार्किंग, विज्ञापन, उपयोगकर्ता शुल्क और अन्य वैध राजस्व स्रोतों को आधुनिक तकनीक से मजबूत करना चाहिए। कर व्यवस्था सरल, पारदर्शी और न्यायसंगत होनी चाहिए।हमें यह तय करना होगा कि हमारे शहर केवल बढ़ें नहीं, बल्कि बेहतर ढंग से विकसित हों। आज आवश्यकता ऐसी नगरीय राजनीति की है, जिसमें दलगत प्रतिस्पर्धा अपनी जगह हो लेकिन शहर का हित सर्वोपरि हो। जनप्रतिनिधि जनता के बीच उपलब्ध हों, अधिकारी जवाबदेह हों, योजनाओं का सामाजिक और वित्तीय ऑडिट हो और प्रत्येक वार्ड के विकास की नियमित समीक्षा हो।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष, (राजस्थान विधानसभा)

Updated on:
25 Sept 2026 05:33 pm
Published on:
25 Sept 2026 05:33 pm