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संपादकीय: अंतरिक्ष में डेटा सेंटर से बढ़ेगी भारत की धाक

इसरो का यह मिशन भारत को वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी विश्लेषण और अनुसंधान के क्षेत्र में कई नई उपलब्धियां दिलाने वाला होगा।

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Jan 10, 2026

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने की भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की योजना फलीभूत होती है तो निश्चित ही डिजिटल दुनिया में भारत की बड़ी उपलब्धि होगी। अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करना महज तकनीक का बेहतर इस्तेमाल ही नहीं होगा, बल्कि इससे देश के अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों को गति मिलेगी। यह भारत को तकनीकी रूप से महाशक्तियों की श्रेणी में भी खड़ा करेगा। यह पहल इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि अभी तक उपग्रहों के माध्यम से सिर्फ डेटा कलेक्शन का काम हो पाता है। इन डेटा को प्रोसेसिंग के लिए पृथ्वी पर स्थित ग्राउण्ड स्टेशनों पर भेजना होता है।

उम्मीद की जा रही है कि अंतरिक्ष में ही संवेदनशील डेटा प्रोसेस हो जाएंगे तो साइबर हमले और डेटा चोरी जैसे खतरों को कम किया जा सकेगा। दुनिया में तेज व सुरक्षित डेटा की मांग के बीच कई प्रतिष्ठित टेक कंपनियां अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने के प्रयासों में जुटी हैं। ये प्रयास इसलिए भी जरूरी समझे जा रहे हैं क्योंकि पृथ्वी पर बने डेटा सेंटर न केवल साइबर हमलों बल्कि भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में भी प्रभावित हो सकते हैं। इसीलिए प्रमुख टेक कंपनियां इसे भविष्य की डिजिटल सुरक्षा का बेहतर माध्यम मान रही हैं। कहा यह भी जा रहा है कि उपग्रह आधारित डेटा सेंटर इंटरनेट और क्लाउड सेवाओं की गति व पहुंच दोनों को मजबूती देंगे। इसरो ने जो योजना तैयार की है वह 'एज कम्यूटिंग' पर आधारित होगी। इसका आशय यह है कि डेटा का विश्लेषण स्रोत के पास ही हो।

सब जानते हैं कि डेटा को पृथ्वी पर भेजने में समय तो लगता ही है, अत्यधिक ऊर्जा भी खत्म होती है। हालांकि इसरो ने इस दिशा में अभी काम की शुरुआत ही की है। ऐसे में आने वाली चुनौतियों को भी ध्यान में रखना होगा। बड़ी चुनौती यह भी है कि युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में यदि डेटा प्रोसेसिंग में देरी हुई तो नुकसानदेह साबित हो सकती है। डर यह भी है कि अंतरिक्ष में स्थित डेटा सेंटर पर कोई तकनीकी खराबी हुई तो उसे दुरुस्त करने में भी समय लगना तय है। अंतरिक्ष में डेटा सेंटर विकसित करने में होने वाला भारी खर्च तो अपनी जगह है ही। लेकिन संंतोष इस बात का भी है कि डेटा संग्रहण और उसके विश्लेषण के इस क्रांतिकारी अभियान में इसरो का साथ निजी संगठन भी दे रहे हैं।

उम्मीद की जा सकती है कि इसरो का यह मिशन भारत को वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी विश्लेषण और अनुसंधान के क्षेत्र में कई नई उपलब्धियां दिलाने वाला होगा। इसरो की ओर से अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े प्रयोगों को इस प्रयास से और मजबूती मिल सकेगी। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्रांति से जुड़े मामलों में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत की अंतरिक्ष में भूमिका बढ़ती जा रही है और इस तरह के प्रयासों के जरिए भारत की वैश्विक शक्ति के रूप में धाक भी बनी हुई है।

Published on:
10 Jan 2026 03:06 pm
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