
रंजना मिश्रा - स्वतंत्र लेखिका एवं स्तंभकार,
आधुनिक विकास की संकल्पना में शहरों को गति, सुगमता और आर्थिक प्रगति का केंद्र माना गया था, लेकिन आज हमारे महानगर और उभरते शहर जिस भीषण ट्रैफिक जाम से जूझ रहे हैं, वह इस विकास मॉडल की सबसे बड़ी विडंबना है। सुबह-शाम दफ्तर या घर पहुंचने की जद्दोजहद में एक आम नागरिक का बहुमूल्य समय और ऊर्जा केवल ब्रेक और क्लच के बीच पिसकर रह गया है।
जिस शहरीकरण को जीवन का स्तर सुधारना था, वह आज एक रेंगती हुई व्यवस्था में तब्दील हो गया है। घंटों जाम में जलता ईंधन न केवल राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि यह हमारे शहरों को गैस के चैंबर में भी बदल रहा है, जिसका सीधा असर हमारी आने वाली पीढिय़ों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसका प्राथमिक कारण केवल संकरी सड़कें या लचर यातायात प्रबंधन नहीं है, बल्कि निजी वाहनों की अनियंत्रित और असीमित वृद्धि है। पिछले कुछ दशकों में पूरा ध्यान व बजट केवल फ्लाईओवर बनाने, अंडरपास खोदने और सड़कों को चौड़ा करने पर केंद्रित रहा है। लेकिन यातायात विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि सड़कें चौड़ी करना ट्रैफिक जाम का स्थायी समाधान नहीं है। जब सड़कें चौड़ी होती हैं, तो लोग निजी वाहनों का अधिक प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं और कुछ ही समय में नई सड़कें भी पुरानी स्थिति में लौट आती हैं। वास्तविक समाधान सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने में निहित है और यह तभी संभव है जब नागरिकों को एक सुदृढ़ और विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन प्रणाली उपलब्ध कराई जाए। हमें विकास और 'स्मार्ट सिटी' की अपनी परिभाषा को बुनियादी रूप से बदलने की जरूरत है। एक विकसित शहर वह नहीं है जहां हर नागरिक के पास कार हो, बल्कि वह है जहां एक अति-संपन्न व्यक्ति भी अपनी कार छोड़कर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना पसंद करे। इसके लिए नीतियों में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।
सड़कों पर बसों के लिए समर्पित लेन, सुरक्षित साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ हमारी शहरी नियोजन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी नीतियों और आम जनता के अनुशासित व्यवहार के बीच एक सटीक और ईमानदार तालमेल की आवश्यकता है। यदि हम अपने शहरों की रुकी हुई धड़कन को फिर से सुचारू रूप से चलाना चाहते हैं, तो हमें वैचारिक सोच और सड़क पर अपनी आदतों, दोनों में ढांचागत बदलाव करने होंगे। निर्बाध चलती हुई सड़कें केवल हमारा समय ही नहीं बचातीं, बल्कि वे शहर की आर्थिक खुशहाली और हमारे जीवन की समग्र गुणवत्ता का भी सबसे प्रामाणिक और जीवंत सूचकांक हैं।
Updated on:
27 Feb 2026 03:09 pm
Published on:
27 Feb 2026 02:46 pm
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