ओपिनियन

नहीं हटती अब लक्ष्य से नजर

साल्ट लेक वर्ल्ड कप (स्टेज थ्री) के रिकर्व फाइनल में गोल्ड अपने नाम कर दीपिका कुमारी ने सबको चौंका दिया है। इसके साथ उन्होंने तुर्की में होने वाले फाइनल के लिए क्वालीफाई भी कर लिया है।

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Jul 01, 2018
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- मनोज जोशी, खेल पत्रकार

रांची की सडक़ों पर ऑटो रिक्शा चलाने वाले शिवनारायण महतो ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी बेटी एक दिन दुनिया की नम्बर एक खिलाड़ी बनेंगी, दो बार ओलिम्पिक में भाग लेंगी, वल्र्ड कप तीरंदाजी में तीन-तीन गोल्ड अपने नाम करेंगी और अर्जुन पुरस्कार से लेकर पद्मश्री जैसे खिताब उनके नाम होंगे। यहां बात हो रही है दीपिका कुमारी की, जो तीरंदाजी की दुनिया में हलचल पैदा कर चुकी हैं।

दीपिका ने पिछले दिनों साल्ट लेक वल्र्ड कप (स्टेज थ्री) के रिकर्व फाइनल में गोल्ड अपने नाम करके सबको चौंका दिया। दीपिका वल्र्ड कप तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतने का जो काम पिछले चार आयोजनों से नहीं कर पा रही थीं, वह काम उन्होंने इस बार कर दिखाया। हालांकि उन्होंने ऐसा करके 2012 और 2013 की ही कामयाबी को दोहराया है लेकिन वल्र्ड कप के लिए क्वालीफाई करके वह दुनिया के शीर्ष तीरंदाजों की जमात में आ गई हैं। यह प्रदर्शन नाजुक मौकों पर चूकने की उनकी पुरानी परेशानी से उन्हें निजात दिलाएगा।

एक तीरंदाज के लिए सबसे अहम मानसिक दृढ़ता होती है। रियो में जरूर उन्होंने टीम इवेंट में क्वार्टर फाइनल तक चुनौती रखी लेकिन वैयक्तिक स्पर्धाओं की बड़ी प्रतियोगिताओं में वह वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाईं जो अन्य प्रतियोगिताओं में करती रही हैं। उनसे बड़ी इवेंट में उसी तरह के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है जो उन्होंने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में दो स्वर्ण पदक जीतकर किया था। इसी मानसिक दृढ़ता में उन्हें निशानेबाजी के इतिहासपुरुष अभिनव बिंद्रा से सीखने की जरूरत है। तब उन्हें टोक्यो ओलिम्पिक में पदक जीतने से कोई नहीं रोक सकेगा। इस समय उनकी विश्व रैंकिंग पांच है। वल्र्ड कप फाइनल में प्रवेश उन्हें एक नई स्फूर्ति देगा।

दीपिका पर ‘लेडीज फर्स्ट’ नाम से एक वृत्तचित्र बन चुका है। इसकी स्क्रीनिंग मालोर्का फिल्म महोत्सव में पिछले साल की गई थी। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने इसे काफी पसंद किया था। अच्छी बात यह है कि दीपिका समय की नजाकत को अब समझने लगी हैं। अपने प्रदेश के महेंद्र सिंह धोनी की तरह ही वह अब अपनी किसी उपलब्धि पर जरूरत से ज्यादा खुश नहीं होतीं और खराब प्रदर्शन पर निराश नहीं होतीं। इसीलिए तुर्की के सैमसन में होने वाले वर्ल्ड कप फाइनल के लिए क्वालीफाई करने पर उन्होंने न तो बड़ी-बड़ी बातें कीं और न ही बड़े-बड़े दावे। इतना ही कहा कि उन्होंने अपने प्रदर्शन को खूब इंजॉय किया और आगे भी इसी तरह अपने खेल को इंजॉय करना चाहती हैं।

Published on:
01 Jul 2018 10:26 am