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संपादकीय: बाजार में अमानक दवाएं कर रहीं मरीजों से खिलवाड़

मुद्दे की बात यह कि पिछले साल 3100 से अधिक दवाएं अमानक और 245 नकली पाई गईं। कार्रवाई के नाम पर 961 मुकदमे चले, लेकिन ज्यादातर कंपनियां बच निकलीं।
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Jan 09, 2026
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किसी भी बीमारी के लिए दवा लेने वाले को यदि बाद में यह पता चले कि वह अमानक दवाओं की श्रेणी में है तो सेहत को लेकर मरीज की चिंता बढऩा स्वाभाविक है। हैरत इसी बात की है कि बाजार में आने के बाद दवाओं के बारे में मुनादी होती है कि ये अमानक हैं इसलिए इनका सेवन नहीं किया जाए। सीधे तौर पर अमानक दवाओं के साथ, इनकी निगरानी करने वाले सिस्टम की नाकामी से मरीजों की जान संकट में आने लगी है। हाल में राजस्थान में दर्द निवारक, खांसी-जुकाम, पेट दर्द और कैल्शियम की दस दवाएं जांच में फेल पाई गईं। केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि समूचे देश में अमानक दवाएं मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं।


अमानक दवाएं आमतौर पर तब मानी जाती है जब उनके रैपर पर अंकित साल्ट की मात्रा तय मापदंडों के अनुसार नहीं होती। मुद्दे की बात यह कि पिछले साल 3100 से अधिक दवाएं अमानक और 245 नकली पाई गईं। कार्रवाई के नाम पर 961 मुकदमे चले, लेकिन ज्यादातर कंपनियां बच निकलीं। जांच में 905 इकाइयों पर कार्रवाई हुई, मगर उत्पादन रोकने या लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्ती नजर नहीं आई। पिछले पांच सालों में अमानक दवाओं से सैकड़ों मौतें हुईं। कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतें तो गहरा जख्म देकर गई हैं। कोई दवा कब मानक श्रेणी से हटा ली जाए इसका भी किसी को अंदाज नहीं होता। खास बात यह है कि कड़े परीक्षण के दौर से गुजरने के बाद ही किसी दवा को बाजार में उतारा जाता है। इसके बावजूद जांच में कोई दवा अमानक पाई जाती है तो मिलीभगत के बिना ऐसा होना आसान नहीं लगता। सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के चलते अमानक दवाएं पहुंचती हैं। बच्चे कफ सिरप से मरते हैं, लेकिन कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाता। जांच की खामियां कई बार दोषियों को बचाने का काम भी करती हैं। कम सजा और भ्रष्टाचार दोनों ही नकली दवा के कारोबारियों के रक्षा कवच बन जाते हैं। दुनिया के दूसरे कई देशों में नकली दवाओं को लेकर सख्त कानून हैं। अमरीका में दस साल की सजा और लाखों का जुर्माना है। यूरोपीय संघ में दवा ट्रैकिंग सिस्टम से नकली दवाएं रोकी जाती हैं, जहां उल्लंघन पर आजीवन कारावास तक सजा है। चीन में तो मौत की सजा तक का प्रावधान है। लेकिन भारत में इस दिशा में काफी काम करना बाकी है।


अमानक दवा से किसी की भी मौत होती है तो इससे बड़ा अपराध कोई नहीं हो सकता। इन पर लगाम लगाने के लिए जांच तंत्र की मजबूती के साथ ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम लागू करना जरूरी है। साथ ही दवा का गुणवत्ता प्रमाणन अनिवार्य करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन का ग्लोबल सर्विलांस मॉडल इस दिशा में उपयोगी हो सकता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दवाओं की निगरानी होती है। समूचे सिस्टम में सुधार की जरूरत है तभी जाकर लोगों को सेहतमंद रखा जा सकेगा।

Updated on:
09 Jan 2026 03:28 pm
Published on:
09 Jan 2026 03:28 pm