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PATRIKA PODCAST : शिक्षा : भाव निरपेक्ष

विदेशी शिक्षा और अंग्रेजी माध्यम में भारत जैसे देशों का तो नाम ही नहीं होता। हमारे दर्शन-ज्ञान-परम्परा को तो भूलने के लिए बाध्य होना पड़ जाता है। सच पूछो तो शिक्षा में विषय पढ़ाए जाते हैं। व्यक्ति की तो चर्चा ही नहीं होती। व्यक्ति गौण या अदृश्य ही हो जाता है। यूं कहो, वह तो घर जाकर शिक्षा को लागू करने की मशीन बन जाता है। उसके चिन्तन की दिशा तय हो चुकी होती है।
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Sep 25, 2026
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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : आधुनिक शिक्षा आर्थिक प्रगति और उपकरणों को अधिक महत्व देती है। उनकी वार्षिक योजना लाभ-हानि पर आधारित होती है, व्यक्ति प्रधान नहीं होती। भारतीय लोग कर्म, व्यक्तिगत व्यवहार तथा दु:ख-सुख में भागीदारी पर आधारित होते हैं। नए संस्थानों में ‘हायर एण्ड फायर’ एक नियमित भाषा है। वहां आपको पीढिय़ां दिखाई नहीं देतीं। नए लोग कर्मचारियों को अपने जीवन का अंग तो बना ही नहीं सकते। वे स्वयं को ही अच्छे-बुरे (लाभ-हानि) के जिम्मेदार - (कर्ताभाव एवं बुद्धि के अहंकार से) मानकर चलते हैं। उनका नजरिया मालिकाना अधिक होता है, माली-बागवान का कम होता है। इसीलिए उनकी दृष्टि तो फलों पर रहती है, सींचने पर नहीं रहती।

Updated on:
25 Sept 2026 04:46 pm
Published on:
25 Sept 2026 04:46 pm