शहर केवल बढ़ें ही नहीं, बल्कि बेहतर ढंग से विकसित हों
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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : आधुनिक शिक्षा आर्थिक प्रगति और उपकरणों को अधिक महत्व देती है। उनकी वार्षिक योजना लाभ-हानि पर आधारित होती है, व्यक्ति प्रधान नहीं होती। भारतीय लोग कर्म, व्यक्तिगत व्यवहार तथा दु:ख-सुख में भागीदारी पर आधारित होते हैं। नए संस्थानों में ‘हायर एण्ड फायर’ एक नियमित भाषा है। वहां आपको पीढिय़ां दिखाई नहीं देतीं। नए लोग कर्मचारियों को अपने जीवन का अंग तो बना ही नहीं सकते। वे स्वयं को ही अच्छे-बुरे (लाभ-हानि) के जिम्मेदार - (कर्ताभाव एवं बुद्धि के अहंकार से) मानकर चलते हैं। उनका नजरिया मालिकाना अधिक होता है, माली-बागवान का कम होता है। इसीलिए उनकी दृष्टि तो फलों पर रहती है, सींचने पर नहीं रहती।