चुनावी मौसम में जब लाखों भारतीयों को मतदान करने के लिए खतरनाक तापमान सहना होगा, सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। गर्मी में बीमारियों से बचाने के लिए सामुदायिक जागरूकता अभियान व तैयारी जरूरी है।
डॉ. महावीर गोलेच्छा, स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ (एम्स, दिल्ली एवं लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से प्रशिक्षित)
भारत में हाल के वर्षों में हीटवेव में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है, जिसका सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक सामंजस्य पर प्रभाव पड़ा है। विश्व बैंक के अनुसार 2030 तक भारत में 200 मिलियन से अधिक लोग हर साल उच्च तापमान का अनुभव करेंगे व गर्मी से संबंधित तनाव के कारण कम उत्पादकता के परिणामस्वरूप करीब तीस मिलियन लोग रोजगार खो देंगे। सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से इस वर्ष का गर्मी का मौसम अप्रेल माह में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ मेल खाने के कारण अहम है। भारत के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव होने जा रहे हैं। मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि इस गर्मी में देश के कई हिस्सों में औसत से ज्यादा गर्म दिन देखने को मिल सकते हैं।
गर्मियों की दमनकारी ऊंचाइयों में होने वाले चुनाव के मद्देनजर, गंभीर स्थिति का पूर्वानुमान लगाना और उसे कम करना महत्वपूर्ण होगा। हीटवेव के हानिकारक परिणाम, सामुदायिक स्तर की तैयारियों के अलावा, बाहरी कार्यक्रमों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा एक सरकारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसे पूरा करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मजबूत और सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता है। सामुदायिक जागरूकता, प्रभावी गर्मी स्वास्थ्य संचार रणनीति, कुशल प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, समुदाय के नेतृत्व वाली तैयारी, सुनियोजित लक्षित जागरूकता आबादी में गर्मी से संबंधित बीमारियों के बोझ को कम करने के लिए सबसे प्रभावी रणनीतियां हैं। यह चुनाव वर्तमान अल नीनो चरण से संक्रमण के साथ मेल खाते हैं, जो प्रशांत महासागर के गर्म होने की वजह से देश में गर्मी और शुष्कता का कारण बनता है, पूर्वानुमानित ला नीना चरण में, जो हीटवेव का महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है।
आइएमडी के मौसमी अनुमानों के आधार पर, भारत के चुनाव आयोग ने चुनावों से पहले ही हीट वेव एडवाइजरी जारी कर दी है। मतदाताओं को गर्मी से सुरक्षा के बारे में सामुदायिक जागरूकता की जरूरत होगी। सभाओं, रैलियों और चुनावी प्रक्रिया के दौरान भाग लेते समय हल्के, ढीले-ढाले सूती कपड़े व टोपी-धूप का चश्मा भी पहनना चाहिए। चुनावी मौसम में जब लाखों भारतीयों को मतदान करने के लिए खतरनाक तापमान सहना होगा, सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। गर्मी में बीमारियों से बचाने के लिए सामुदायिक जागरूकता अभियान व तैयारी जरूरी है। चूंकि भारतीय आबादी चरम मौसम के बीच चुनावों का सामना कर रही है, इसलिए जरूरी है कि सभी लोगों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।