
छतरपुर के एक छोटे से गांव के निजी स्कूल में पांच साल के बच्चे को स्कूल बैग न लाने पर पीटे जाने और उसका पैर टूट जाने की खबर को केवल एक शिक्षक की क्रूरता ही मान लेना उचित नहीं होगा। यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ती है कि आखिर बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक चुनते समय आखिर देखा क्या जाता है? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसी घटनाएं गाहे-बगाहे सामने आती ही रहती हैं। हाल में विशाखापत्तनम में छह साल के बच्चे की शिक्षक द्वारा कथित पिटाई के बाद मौत का मामला भी सामने आया। गुजरात के एक स्कूल में छात्र की पिटाई और उत्तर प्रदेश में छात्र को पीटने के बाद अभिभावक को धमकाने की घटनाएं भी सामने आईं। परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन चिंता एक ही है- जिस व्यक्ति के हाथ में बच्चे की सुरक्षा और व्यक्तित्व निर्माण की जिम्मेदारी है, वही कभी-कभी उसके लिए भय का कारण कैसे बन जाता है?
हमारे देश में शिक्षकों की भर्ती के लिए शैक्षणिक और पेशेवर पात्रता के मानक तय हैं। लेकिन शायद अब यह पूछने का समय है कि क्या शिक्षक के लिए केवल 'योग्य' होना पर्याप्त है? सैनिक का चयन करते समय हम केवल उसकी शैक्षणिक योग्यता नहीं देखते। शारीरिक क्षमता, अनुशासन और दूसरे कई पहलुओं को परखा जाता है। फिर शिक्षक के मामले में यह मान लेने का जोखिम क्यों है कि विषय का ज्ञान और निर्धारित पात्रता उसे बच्चों के साथ व्यवहार के लिए भी तैयार कर देती है? शिक्षक का सामना रोज ऐसे बच्चों से होता है जो अलग-अलग स्वभाव, पारिवारिक परिस्थितियों और सीखने की क्षमताओं के साथ आते हैं। पांच साल का बच्चा बैग भूल सकता है, होमवर्क नहीं कर सकता, शोर कर सकता है, सवाल पूछ सकता है, जिद कर सकता है। लेकिन शिक्षक की असली परीक्षा शायद यहीं से शुरू होती है। इसलिए शिक्षक चयन की प्रक्रिया पर नए सिरे से विचार जरूरी है। शैक्षणिक योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षा अपनी जगह आवश्यक है, लेकिन इनके साथ बाल मनोविज्ञान, भावनात्मक परिपक्वता, धैर्य और संवेदनशीलता को भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनाया ही जाना चाहिए। नियुक्ति की शुरुआती अवधि में उसके व्यवहार का नियमित मूल्यांकन हो और इसे केवल पढ़ाने की क्षमता से नहीं, बच्चों के साथ व्यवहार से भी जोड़ा जाए। शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण में विषय पढ़ाने के साथ गुस्से को संभालना, बच्चों के व्यवहार को समझना, बिना हिंसा अनुशासन कायम करना और बाल अधिकारों जैसे विषय भी शामिल हों।शिक्षक का चयन सिर्फ किसी नौकरी के लिए चयन नहीं है। यह उस व्यक्ति का चयन है, जो भावी पीढ़ी के ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व को आकार देगा। इसलिए प्रत्येक शिक्षक की योग्यता की परीक्षा जरूरी है, लेकिन उसकी संवेदना की परीक्षा उससे कम जरूरी नहीं।