एलपीजी के मुकाबले कहीं अधिक सस्ती पडऩे वाली पीएनजी की लाइनें बिछाने के दावे बरसों से किए जा रहे हैं लेकिन इसकी रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई। आर्थिक रूप से व सुरक्षा की दृष्टि से पीएनजी की उपयोगिता ज्यादा बेहतर है।
पश्चिम एशिया में अमरीका व ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच भारत समेत पांच देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकासी की छूट मिली है। यह छूट तेल और एलपीजी आपूर्ति पर आए संकट के बीच राहत देने वाली कही जा सकती है। लेकिन इतना जरूर है कि युद्ध के इस संकट ने देश में रसोई के बजट और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती पेश की है। यही वजह है कि गैस आपूर्ति सिस्टम को संतुलित करने व एक ही ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में अब तेजी से प्रयास होने लगे हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत सरकार ने देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के नेटवर्क के विस्तार की गति में तेजी लाने का फैसला किया है। वहीं अब यह भी अनिवार्य किया जा रहा है कि जहां पीएनजी लाइन है वहां यदि लोगों ने पीएनजी कनेक्शन नहीं लिया तो उन्हें एलपीजी की आपूर्ति रोकी जा सकती है।
एक तथ्य यह भी है कि फिलहाल देश में रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा एलपीजी सिलेंडरों के जरिये ही पूरा होता है क्योंकि पीएनजी का नेटवर्क सीमित शहरों में ही पहुंच पाया है। देश में 33 करोड़ से ज्यादा घरेलू एलपीजी उपभोक्ता है जबकि महज 1.5 करोड़ घरों में ही पीएनजी कनेक्शन पहुंच पाया है। जबकि पीएनजी स्वदेशी और अधिक भरोसेमंद विकल्प है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एलपीजी की तरह सिलेंडर खत्म होने और उसे रिफिल कराने की चिंता नहीं होती। पीएनजी आपूर्ति घरों में नलों के जरिए होने वाली जलापूर्ति की तरह होती है और सबसे बड़ी बात यह कि चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है।
पीएनजी का नेटवर्क बढ़ाने को लेकर की जा रही तैयारियों का स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन यह भी एक तथ्य है कि 'आग लगने पर कुआं खोदने' की माफिक अब जाकर पीएनजी की सुध ली जा रही है। एलपीजी के मुकाबले कहीं अधिक सस्ती पडऩे वाली पीएनजी की लाइनें बिछाने के दावे बरसों से किए जा रहे हैं लेकिन इसकी रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई। आर्थिक रूप से व सुरक्षा की दृष्टि से पीएनजी की उपयोगिता ज्यादा बेहतर है। पीएनजी और एलपीजी की तुलना करें तो पीएनजी आर्थिक रूप से काफी सस्ती पड़ती है। एलपीजी में उपभोक्ता को पूरे सिलेंडर का भुगतान पहले करना होता है जबकि पीएनजी आपूर्ति में 'पे-एज-यू-यूज' (जितना इस्तेमाल, उतना बिल) मॉडल काम करता है। इसके अलावा, सिलेंडर फटने या लीकेज का खतरा भी पीएनजी में न के बराबर होता है क्योंकि इसका दबाव काफी कम रखा जाता है। जरूरत इस बात की है कि जिन इलाकों में पीएनजी लाइनें आसानी से बिछाई जा सके वहां एलपीजी पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करने के प्रयास हों। रसोई गैस संकट का जोखिम कम करने का यही कारगर उपाय है।