ओपिनियन

शरीर ही ब्रह्माण्ड:प्रकृति-पुरुष ही क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ

Gulab Kothari Article Sharir Hi Brahmand: अध्यात्म के चार अंग हैं—शरीर, मन, बुद्धि व आत्मा। इनमें से बुद्धि आग्नेयी व मन सौम्य है। पुरुष में आग्नेयी बुद्धि की प्रधानता रहती है तथा स्त्री में सौम्य मन की। प्रजा की उत्पत्ति में स्थूल-सूक्ष्म व कारण तीनों शरीर काम आते हैं। स्थूल दृष्टि से पुरुष एवं स्त्री क्रमश: आग्नेय व सौम्य हैं। सूक्ष्म स्तर पर ये ही क्रमश: शुक्र व शोणित रूप में सोम और अग्नि हैं। शरीर ही ब्रह्माण्ड शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- प्रकृति-पुरुष ही क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ

less than 1 minute read
Jul 26, 2024

Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: "शरीर स्वयं में ब्रह्माण्ड है। वही ढांचा, वही सब नियम कायदे। जिस प्रकार पंच महाभूतों से, अधिदैव और अध्यात्म से ब्रह्माण्ड बनता है, वही स्वरूप हमारे शरीर का है। भीतर के बड़े आकाश में भिन्न-भिन्न पिण्ड तो हैं ही, अनन्तानन्त कोशिकाएं भी हैं। इन्हीं सूक्ष्म आत्माओं से निर्मित हमारा शरीर है जो बाहर से ठोस दिखाई पड़ता है। भीतर कोशिकाओं का मधुमक्खियों के छत्ते की तरह निर्मित संघटक स्वरूप है। ये कोशिकाएं सभी स्वतंत्र आत्माएं होती हैं।"

पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर

Updated on:
26 Jul 2024 10:53 pm
Published on:
26 Jul 2024 06:59 pm
Also Read
View All

अगली खबर