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प्रसंगवश: फाइलों की कछुआ चाल से कैसे विकसित होगा छत्तीसगढ़

वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में आवंटित राशि का पीएचई 19 फीसदी ही खर्च कर सका, तो पीडब्ल्यूडी का 52 फीसदी फंड हो गया लैप्स...

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विकसित भारत 2047 के लिए प्रदेश भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहता है और इसके लिए विकसित छत्तीसगढ़ 2047 का विजन तैयार कर विकास के रोडमैप पर कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार इसके तहत लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न अधोसंरचनाओं के निर्माण पर पूरा जोर लगा रही है।

विकसित छत्तीसगढ़ की राह की सबसे बड़ी बाधा यानी कि नक्सली और नक्सल हिंसा को समाप्त कर प्रदेश इसी साल मार्च में नक्सलमुक्त कर दिया गया है। प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियों को आमंत्रित किया जा रहा है। ये बड़े उद्योग समूह प्रदेश में बड़ा निवेश भी करने जा रहे हैं।

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नक्सल मुक्त बस्तर में संचार साधनों को ठीक किया जा रहा है। आवागमन को सुलभ बनाने के लिए सड़कें बनाई जा रही हैं। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में सड़क निर्माण की कई परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। कुछ परियोजनाओं पर कार्य शुरू भी हो गया है।

इस बीच, कुछ रिपोर्ट्स और तथ्य सामने आए हैं, जिनके मुताबिक छत्तीसगढ़ में वित्तीय वर्ष 2025-26 में विकास की रफ्तार बहुत ही धीमी रही। प्रदेश के वे विभाग जिन पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और विकास कार्य करने का जिम्मा होता है यानी कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) बजट 2025-26 में आवंटित राशि का पूरा इस्तेमाल ही नहीं कर सके।

विडंबना है कि जहां पीएचई विभाग मात्र 19 प्रतिशत राशि ही खर्च कर सका, वहीं पीडब्ल्यूडी का 52 प्रतिशत फंड उपयोग नहीं कर पाने की वजह से लैप्स हो गया। इसका कारण इन विभागों का तकनीकी रूप से तैयार नहीं होना और फाइलों की कछुआ चाल को बताया जा रहा है। सरकार को विकसित छत्तीसगढ़ के लिए इन विभागों पर विशेष ध्यान देना होगा। -अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com

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