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International Youth Day 2021: युवाओं का स्वास्थ्य हो विकास की अवधारणा का केंद्रबिंदु

International Youth Day 2021: अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 2021 का विषय है - 'ट्रांसफॉर्मिंग फूड सिस्टम्स: यूथ इनोवेशन फॉर ह्यूमन एंड प्लैनेटरी हेल्थ'।यह माना गया है कि खाद्य सिस्टम में बदलाव के लिए किए जा रहे वैश्विक प्रयासों की सफलता युवा लोगों की सार्थक भागीदारी के बिना संभव नहीं है।
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International Youth Day 2021
International Youth Day 2021

सुनीता नारायण

(लेखिका सतत विकास की हरित अवधारणा की पैरोकार, सीएसई की महानिदेशक हैं)

International Youth Day 2021: आज (12 अगस्त) अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस है। एक ओर विश्व महामारी से अब तक जूझ रहा है तो दूसरी ओर इसे जल्द ही जलवायु परिवर्तन से उपजी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आइपीसीसी) की हाल ही जारी छठी जायजा रिपोर्ट (एआर-6) के पहले भाग में चेताया गया है कि अब 'शायद' की गुंजाइश नहीं रह गई है। वास्तविकता यही है कि जलवायु परिवर्तन के खतरों का सामना जल्द ही करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में उसी की पुष्टि की गई है, जो हम पहले से जानते हैं और अपने इर्द-गिर्द देख रहे हैं। लेकिन क्या हम उनकी आहट सुन रहे हैं? क्या इन्हें टालने के लिए हम जरूरी कदम उठा रहे हैं। युवा जलवायु योद्धा ग्रेटा थनबर्ग और उनके समर्थक यही सवाल करते आए हैं - यदि जलवायु परिवर्तन के खतरे सामने आते हैं, जो कि आने ही हैं तो हमारा भविष्य क्या होगा? दरअसल इस धरा के वारिस युवा हमसे यही सवाल कर रहे हैं कि हम उन्हें कैसी विरासत सौंपेंगे? हम क्या कर रहे हैं? अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर उम्मीद है युवाओं के यही सवाल बाकी लोगों को इस बारे में चेताएंगे। माता-पिता की कंपनियों के बोर्डरूम से लेकर मंत्रियों के कार्यालयों तक यह आवाज पहुंचेगी।

दरअसल, अगर हम बच्चों के स्वास्थ्य को प्रगति का पैमाना मान कर चलें तो ही अपनी धरती को बचा सकते हैं। हम भविष्य के कर्णधार, आज के युवाओं को एक भीषण गर्म भट्टीनुमा दुनिया नहीं दे सकते! पर्यावरण विघटन और विषाक्तता उनके जीवन पर दुष्प्रभाव डालते हैं। इसलिए विकास के ब्रह्मांड के केंद्र में उन्हें ही रखना होगा, जहां विकास का पैमाना उनका स्वास्थ्य हो। साफ-सफाई का अभाव बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसके चलते वे कुपोषण, गंभीर बीमारियों, यहां तक कि मौत के शिकार हो जाते हैं। सेनिटेशन व्यवस्था सुधारनी होगी। अपशिष्ट निस्तारण और पर्यावरण की दृष्टि से पुनर्चक्रण पर विचार करना होगा, केवल शौचालय की संख्या गिनने से काम नहीं चलेगा। प्रदूषण स्तर डायरिया और मलेरिया के आंकड़ों पर नापें। इसके अलावा घरों में स्वच्छ ऊर्जा और शहरों में स्वच्छ हवा की बड़ी समस्या है, जो मुख्यत: बच्चों में बीमारियों का कारण है। इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य के पैमाने पर ही स्वच्छ हवा और स्वच्छ ऊर्जा के विकास को मापना ठीक रहेगा। इसके अलावा, निस्संदेह अच्छी और सार्थक शिक्षा जीवन बदल सकती है। ऐसे प्रमाण मौजूद हैं कि एक बालिका को शिक्षित करने से किसी देश की प्रजनन दर और जनसंख्या ग्राफ में बदलाव आने की शुरुआत होती है। शिक्षा से ही उपभोक्ता अधिक जागरूक होते हैं। अगली पीढ़ी अगर ऐसी ही जीवनशैली जारी रखे तो धरती को बचाने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

यह भी स्पष्ट है कि आजीविका महत्त्वपूर्ण है। मशीनीकरण के दौर में रोजगार की कमी से युवाओं में असुरक्षा की भावना है। ऐसे कौन-से कौशल हैं जो संसार को नया स्वरूप दें, जो जलवायु परिवर्तन संकट का कारण न बने। क्या हमने 'ग्रीन इकोनॉमी' के लिए रोजगार गढ़े हैं? इस सवाल का जवाब न केवल भविष्य निर्माण में सहायक होगा, बल्कि वर्तमान को भी दुरुस्त कर देगा। इस तरह हम इस ग्रह के स्वास्थ्य को हमारे युवाओं के स्वास्थ्य और कल्याण के लिहाज से माप सकेंगे। उम्मीद है हम ग्रेटा और उसके जैसे अन्य युवाओं को भरोसा दिला सकेंगे कि हम नया भविष्य गढऩे की ओर प्रयासरत हैं। कल से नहीं, आज ही से!

Published on:
12 Aug 2021 08:42 am