ओपिनियन

जातिप्रथा: अर्थव्यवस्था से जन्मी व्यवस्था, जिसे राजनीति ने विवाद बना दिया

दूरदृष्टा कुलिश जी: 1 मार्च 1995 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित 'कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य नहीं, हम सब शूद्र हैं' आलेख

2 min read
Mar 17, 2026
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी

कर्पूर चंद्र कुलिश जी का मानना था कि जातिप्रथा मूल रूप से आर्थिक और कर्म आधारित विभाजन से उत्पन्न हुई है। विभिन्न जातियां पारंपरिक पेशों, स्थानों या प्रभावशाली व्यक्तित्वों से मिलकर बनीं और उत्पादन, सेवा व वितरण को व्यवस्थित करती रहीं। वंशानुगत कौशल के कारण शिल्प और कार्य पीढ़ियों तक विकसित होते रहे। हालांकि समय के साथ इसे कुप्रथा मानकर आलोचना की गई।

कुलिश जी ने स्पष्ट कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी जातिप्रथा समाप्त नहीं हुई, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। राजनीतिक स्वार्थ, अज्ञानता और गलत नीतियों के कारण इस व्यवस्था की शक्ति को समझने के बजाय इसे विवाद और वोटबैंक की राजनीति का साधन बना दिया गया।

ये भी पढ़ें

दुरदृष्टा कुलिश जी: रेगिस्तान में पानी…हर बूंद के लिए संघर्ष की कहानी

ये भी पढ़ें

दूरदृष्टा कुलिश जीः भारत की आत्मा… संकट में भी अडिग रहता राष्ट्र

Also Read
View All

अगली खबर