ऐसे थे कुलिश जी : उनका अहसास ही ऊर्जा देता
Also Read
View All
कुलिश जी के लेखों पर आधारित पुस्तक 'दृष्टिकोण' में बढ़ते शहरीकरण पर गहन चिंता
कुलिश जी मानते थे कि भारत के गांव केवल आबादी के केंद्र नहीं, बल्कि अपार श्रमशक्ति, अनुभव और जीवन ज्ञान के स्रोत हैं। ग्रामीण समाज निरक्षर होते हुए भी प्रकृति, ऋतु, मिट्टी और जीवन के संतुलन को गहराई से समझता है। दुर्भाग्य यह रहा कि आजादी के बाद भी योजनाओं में गावों की इस शक्ति और जीवन दृष्टि को ठीक ढंग से समझा नहीं गया। गावों में विकास नहीं होने से लोग शहरों की ओर भागे- ऐसे में शहर की अव्यवस्थित भीड़ में बदलने लगे। जनसंख्या का क्षेत्रीय असंतुलन कई प्रकार की समस्या लेकर आया।