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दूरदृष्टा कुलिश जीः गावों की श्रमशक्ति, देश के विकास की छिपी हुई पूंजी

कुलिश जी के लेखों पर आधारित पुस्तक 'दृष्टिकोण' में बढ़ते शहरीकरण पर गहन चिंता

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Mar 14, 2026
राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी

कुलिश जी मानते थे कि भारत के गांव केवल आबादी के केंद्र नहीं, बल्कि अपार श्रमशक्ति, अनुभव और जीवन ज्ञान के स्रोत हैं। ग्रामीण समाज निरक्षर होते हुए भी प्रकृति, ऋतु, मिट्टी और जीवन के संतुलन को गहराई से समझता है। दुर्भाग्य यह रहा कि आजादी के बाद भी योजनाओं में गावों की इस शक्ति और जीवन दृष्टि को ठीक ढंग से समझा नहीं गया। गावों में विकास नहीं होने से लोग शहरों की ओर भागे- ऐसे में शहर की अव्यवस्थित भीड़ में बदलने लगे। जनसंख्या का क्षेत्रीय असंतुलन कई प्रकार की समस्या लेकर आया।

Published on:
14 Mar 2026 01:40 pm
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