आपकी बात: गर्मी में पेयजल संकट को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
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कुलिश जी के यात्रा वृत्तांत पर आधारित पुस्तक 'मैं देखता चला गया' से
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि एक गहरी संस्कृति और जीवन- संघर्ष की कहानी है। पानी का महत्व कितना है, यह कुलिश जी ने सत्तर के दशक में राजस्थान के दौर में नजदीक से महसूस किया। उन्होंने लिखा कि विभिन्न इलाकों में पानी की कमी को लेकर अलग-अलग गीत संवाद बने हुए हैं। चूरू सहित कई जिलों में लोग रेत के समुद्र को मथकर पानी की हर बूंद जुटाते रहे हैं। दूसरी ओर, बीकानेर जैसे शहरों में कभी तालाबों की सुनियोजित व्यवस्था से जल-संकट कम होता था, लेकिन बढ़ती आबादी और अतिक्रमण ने इन जलस्त्रोतों को नष्ट कर दिया। परिणामस्वरुप जल संकट और बारिश में जलभराव जैसी समस्याएं बढ़ती जाती हैं।