ब्रेन स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग और इसके ऊतकों के बीच खून की नसें फट जाती हैं। भारत में भी हर साल 15 लाख से ज्यादा लोग ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आते हैं। चिंताजनक यह है कि इनमें से 90 फीसदी मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। तत्काल इलाज से खतरे को टाला जा सकता है।
मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में छपी शोध रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है कि वायु प्रदूषण के कारण भी दुनिया में ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। पहली बार स्ट्रोक से मौतों की संख्या 2021 में बढक़र 1.19 करोड़ हो गई, जो 1990 के मुकाबले 70 फीसदी ज्यादा है। रिपोर्ट में वायु प्रदूषण के अलावा धूम्रपान, शराब के सेवन, मोटापा, डायबिटीज और नियमित व्यायाम के अभाव को भी ब्रेन स्ट्रोक के लिए जिम्मेदार बताया गया। ब्रेन स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग और इसके ऊतकों के बीच खून की नसें फट जाती हैं। भारत में भी हर साल 15 लाख से ज्यादा लोग ब्रेन स्ट्रोक की चपेट में आते हैं। चिंताजनक यह है कि इनमें से 90 फीसदी मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। तत्काल इलाज से खतरे को टाला जा सकता है।
दरअसल, तेज रफ्तार जीवनशैली के कारण लोग स्वास्थ्य के मोर्चे पर कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनमें तनाव सबसे बड़ी समस्या है, जिसे तब तक नजरअंदाज किया जाता है, जब तक पानी सिर से नहीं गुजर जाता। अमरीकी शोधकर्ताओं के मुताबिक तनाव की अनदेखी भी दुनिया की बड़ी आबादी के लिए ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ा रही है। एक जमाने में ब्रेन स्ट्रोक दुर्लभ मामलों में गिना जाता था। अब यह हार्ट अटैक और कैंसर के बाद दुनियाभर में मौतों का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है। दो साल पहले ‘द लैंसेट’ में ही छपे ब्रिटेन और चीन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के शोध में बताया गया था कि युवा पीढ़ी में शराब के बढ़ते सेवन से भी ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है। शराब के कारण युवा कम उम्र में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल और लिवर की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इन बीमारियों से ब्रेन स्ट्रोक की पटकथा की शुरुआत होती है।
शुरू में ही खतरे का निदान हो जाए तो लाखों का जीवन बचाया जा सकता है। समय पर निदान नहीं होने से कई लोग ब्रेन स्ट्रोक के बाद लकवे की चपेट में आ जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, चेहरे या हाथ-पैर का अचानक सुन्न होना या कमजोरी महसूस होना ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर डॉक्टरों से परामर्श में देर नहीं की जानी चाहिए।
लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। पिछले साल इस दिवस की थीम थी द्ग ‘मिलकर हम स्ट्रोक को हरा सकते हैं।’ इस थीम के हौसले को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। लोगों की सामूहिक शक्ति बड़ी से बड़ी समस्या को परास्त कर सकती है। सरकारों को भी स्ट्रोक की रोकथाम की प्रभावी रणनीति के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।