
नरेंद्र मोदी जी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली। उस दिन से शुरू हुआ जनसेवा का सिलसिला 25 वर्षों से अविराम जारी है। विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर आत्मगौरव और आत्मनिर्भरता के नए युग में प्रवेश कराया है। यह अवसर मां भारती के सपूत के अभिनंदन के साथ ही उनके संकल्पों में सहभागिता का भी है। जब उन्होंने गुजरात के शासन की कमान संभाली, तब राज्य विनाशकारी भुज भूकंप की पीड़ा से जूझ रहा था। इस पीड़ा से उन्होंने न केवल गुजरात को उबारा, बल्कि उसे भारत का ग्रोथ इंजन भी बना दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मूलमंत्र देश को दिया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन को साकार करते हुए उन्होंने अपनी हर योजना के केंद्र में अंतिम व्यक्ति को रखा। डिजिटल वित्तीय समावेशन के माध्यम से उन्होंने देश के करोड़ों गरीबों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा। जनधन-आधार-मोबाइल की त्रिमूर्ति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत पैसा सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचने लगा। उज्ज्वला योजना से करोड़ों माताओं-बहनों को धुएं से मुक्ति मिली, स्वच्छ भारत अभियान ने जन-स्वास्थ्य और नारी सम्मान के प्रयासों को नया आयाम दिया, प्रधानमंत्री आवास योजना ने करोड़ों परिवारों को पक्की छत प्रदान की और आयुष्मान भारत ने देश के हर नागरिक को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज का सुरक्षा कवच दिया।
छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है और एक जनजातीय समाज के प्रतिनिधि के रूप में मैं व्यक्तिगत रूप से इस बात का साक्षी हूं कि प्रधानमंत्री ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए जो कार्य किए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। इनका असर सार्वजनिक जीवन के सभी क्षेत्रों में दिख रहा है। आजादी के सात दशकों बाद देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद पर द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का ऐतिहासिक निर्णय हो या देश के विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के लिए पीएम-जनमन योजना की शुरुआत, पीएम मोदी ने जनजातीय समाज की संस्कृति, कला और अधिकारों को संरक्षित करते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से देश के जनजातीय बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं का समग्र विकास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्यों के विकास और समृद्धि के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का स्नेह सदैव रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के स्वर्णिम कालखंड की एक सबसे महत्वपूर्ण पहचान भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रांसफॉर्मेशन है। देश के कोने-कोने में एक्सप्रेसवे का जाल बिछ रहा है, वंदेभारत ट्रेनें दौड़ रही हैं, हवाई अड्डों और बंदरगाहों का रेकॉर्ड समय में आधुनिकीकरण हो रहा है। मध्य भारत में हमारे प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति की वजह से इस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रांसफॉर्मेशन का सर्वाधिक लाभ हमें मिल रहा है।
डिजिटल इंडिया और यूपीआई की सफलता ने विश्व के विकसित देशों को भी भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया है। आज दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन का एक बड़ा हिस्सा अकेले भारत में हो रहा है। सेमीकंडक्टर निर्माण से लेकर स्पेस टेक्नोलॉजी, एआई और ग्रीन एनर्जी तक भारत नई तकनीक के केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प ने देश के विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा दी है।
पीएम मोदी ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनः जागृत किया है। 500 वर्षों के लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का क्षण पूरे देश के लिए सांस्कृतिक स्वाभिमान का सूर्योदय था। काशी विश्वनाथ धाम का भव्य रूप, महाकाल लोक का विकास और देशभर में धरोहरों का संरक्षण, यह दर्शाता है कि विकास और विरासत साथ-साथ चलते हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्वप्न को साकार किया। सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस का संदेश दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने नक्सलमुक्त भारत का संकल्प साकार किया, इससे बस्तर में शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
वैश्विक पटल पर आज भारत की आवाज को सम्मानपूर्वक सुना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी के कूटनीतिक कौशल का ही परिणाम है कि भारत की मेजबानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने इतिहास रचा। योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाना भारत के सॉफ्ट पावर का प्रमाण है।
आज जब देश विकसित भारत के निर्माण का महान संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, तो हम पर पूरी दुनिया की नजर है। विकसित भारत केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि भारत को पुनः विश्वगुरु के पद पर स्थापित करने की एक सांस्कृतिक प्रतिज्ञा भी है। पीएम मोदी की प्रेरणा के अनुरूप हम सब विकसित भारत के निर्माण के इस महायज्ञ में आहूति करेंगे और उनका संकल्प अवश्य पूरा करेंगे।
- विष्णु देव साय (लेखक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं)