Pravah: सरकार को अब राजस्थान के बेरोजगारों के साथ संवेदनशून्यता का बर्ताव बंद कर देना चाहिए। 'रीट' को तुरंत रद्द कर किसी ऐसी ऐजेंसी को जांच सौंप देनी चाहिए जो किसी के प्रभाव में न आए। अगर जनता का विश्वास कायम रखना है तो पूरी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने चाहिएं।
भुवनेश जैन
'रीट' पेपर घोटाले को जितना दबाने की कोशिश हो रही है, यह उतना ही उजागर हो रहा है। नीचे से ऊपर तक कई चेहरे भी स्पष्ट हो चुके हैं। लेकिन लग रहा है कि पूरी सरकार ही असली अपराधियों को बचाने में जुट गई है। इसीलिए यह जिद की जा रही है कि 'रीट' को रद्द नहीं किया जाएगा। जांच में यह बात साफ होने लगी है कि 'रीट' को करोड़ों रुपए की कमाई का जरिया बनाया गया था। पेपर लीक कैसे हों और कैसे बेचे जाएं, इसकी षड़यंत्रपूर्ण योजना बनाई गई। 'रीट' रद्द किया जाता है तो लाखों रुपए देकर पेपर खरीदने वाले षड़यंत्रकारियों का गला पकड़ लेंगे।
राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) के प्रश्न पत्र लीक होने के प्रकरण ने साबित कर दिया है कि बेरोजगारी के मामले में ही नहीं, भ्रष्टाचार में भी राजस्थान देश में शीर्ष स्थान तक पहुंच चुका है। जितना बड़ा घोटाला हुआ, उसे देखते हुए पहले कदम के रूप में परीक्षा को रद्द कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा आज तक नहीं किया गया। निलंबन और गिरफ्तारियों की छोटी-मोटी कार्रवाइयां कर दिखावा किया जा रहा है ताकि मोटे अपराधियों को बचा लिया जाए।
अब तक हुए खुलासे से यह स्पष्ट है कि जयपुर में प्रश्न पत्र निजी संस्था में रखना, उनकी 'रखवाली' के लिए आपराधिक चरित्र वालों की तैनातगी सुनिश्चित करना, ये ऐसे तथ्य हैं जो एक बड़े षड़यंत्र की ओर इशारा करते हैं। और इतना बड़ा षड़यंत्र उच्च स्तर पर राजनीतिक संरक्षण और मिलीभगत के बिना पूरा नहीं हो सकता।
कहने को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष को बर्खास्त और सचिव को निलंबित कर दिया गया, पर क्या बिना 'अभयदान' के वे इतना बड़ा षड़यंत्र अपने बूते पर रच सकते थे।
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सरकार को अब राजस्थान के बेरोजगारों के साथ संवेदनशून्यता का बर्ताव बंद कर देना चाहिए। 'रीट' को तुरंत रद्द कर किसी ऐसी ऐजेंसी को जांच सौंप देनी चाहिए जो किसी के प्रभाव में न आए। अगर जनता का विश्वास कायम रखना है तो पूरी निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने चाहिएं।
क्षुद्र स्वार्थों के लिए पूरे प्रदेश की प्रतिष्ठा दावं पर लगाने वालों को सलाखों के पीछे डालना ही होगा। सिर्फ दिखावे की कार्रवाई से न तो बेरोजगारों का भला होगा, न प्रदेश का और न स्वयं सरकार का। bhuwan.jain@epatrika.com
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