ओपिनियन

आधार की अड़चनें

सरकार कोई भी कानून लाए, उसे हक है। लेकिन इतना ध्यान अवश्य रखा जाए कि, जनता को अनावश्यक परेशानियों के जंजाल में नहीं फंसना पड़े।

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Aug 26, 2018
adhar card

तो अब आधार सत्यापन के लिए चेहरे की पहचान भी जरूरी होगी। यानी नए सिरे से फिर एक नई कवायद। यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इण्डिया सुरक्षा कारणों से आधार के इस्तेमाल के लिए अब चरणबद्ध तरीके से चेहरे की पहचान अनिवार्य करने जा रही है। पंद्रह सितंबर से इसकी शुरुआत टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं से नया सिम जारी करने पर की जा रही है। लाख टके का सवाल ये कि, सुरक्षा कारणों से उठाया जा रहा ये कदम क्या पहले नहीं उठाया जा सकता था?

सभी योजनाओं को आधार से जोडऩे की सरकारी सोच आमजन को लाभ पहुंचाने के इरादे से की गई थी। लेकिन सरकार को इससे जुड़ी परेशानियों की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। आधार सत्यापन के लिए चेहरे की पहचान के आगामी चरणों में नए सिरे से बैंक खाते, मोबाइल, भविष्य निधि खाते, बीमा पॉलिसी और गैस कनेक्शन खातों से जोडऩा होगा यानी हर खाते के लिए फिर से अलग-अलग मशक्कत।

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देश का आमजन सरकार के फैसलों की पालना के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन एक काम के लिए दस बार लाइन में लगने की बाध्यता को कहां तक उचित माना जा सकता है। ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती कि एक ही स्थान पर आधार को सभी खातों और सभी योजनाओं से जोड़ा जा सके। आधार की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट की राहत के बावजूद अनेक जगह लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कम पढ़े-लिखे लोगों को बेवजह चक्कर लगाने को विवश होना पड़ता है। सरकार कोई भी कानून लाए लेकिन गहन सोच-विचार के बाद ताकि उसमें बार-बार संशोधन नहीं करने पड़ें। जीएसटी का उदाहरण सबके सामने है।

आनन-फानन में जीएसटी लागू करने का ही परिणाम है कि सालभर से इसमें आए दिन संशोधन करने पड़ रहे हैं। यही हाल आधार का भी है। नित नए आदेशों से जनता भ्रमित हो रही है। उम्र बढऩे के कारण बुजुर्गों के फिंगर प्रिंट मिटने की शिकायतों के बाद चेहरे की पहचान को अनिवार्य बनाया जा रहा है। उम्र बढऩे के कारण चेहरे में आने वाले बदलाव से चेहरे की पहचान पर भी तो असर पड़ सकता है। इस पर अभी विचार किया जाए तो अच्छा रहेगा।

सरकार कोई भी कानून लाए, उसे हक है। लेकिन इतना ध्यान अवश्य रखा जाए कि जनता को अनावश्यक परेशानियों के जंजाल में नहीं फंसना पड़े। यहां सवाल सिर्फ आधार का ही नहीं है। बैंक खाता खोलना हो या पासपोर्ट बनवाना, आम आदमी के लिए आज भी परेशानी का कारण बने हुए हैं। जमीनों के पट्टे लेना अथवा नामांतरण कराने में आने वाली दिक्कतों से सभी परिचित हैं। जरूरत ऐसे कानून और नियमों को सरल बनाने की है। नियम जितने सरल होंगे, भ्रष्टाचार पर उतनी ही लगाम लगेगी। सरकारी कार्यालयों में नियमों की आड़ लेकर ही रिश्वत का खेल खेला जाता है। आधार कार्ड देश के करोड़ों लागों की पहचान से जुड़ा मामला है इसलिए इसे उतनी ही गंभीरता से लिया जाने की जरूरत है।

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Published on:
26 Aug 2018 03:28 pm
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