
health management, health, govt hospital
- डॉ. नरेंद्र गुप्ता, चिकित्सक
विश्व स्वास्थ्य संगठन की वर्ष २००५ में हुई वार्षिक सभा में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि सभी सदस्य राष्ट्र अपने नागरिकों के लिए यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (सभी को स्वास्थ्य सेवाएं) का लक्ष्य प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही विश्व के अधिकतर राष्ट्रों में इसके लिए प्रयत्न होने लगे। भारत में भी वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन शुरू हुआ। इस मिशन के लक्ष्य 2012 तक हासिल किए जाने थे। ऐसा नहीं हो सका और 2017 तक इसकी अवधि बढ़ा दी गई।
राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन को जोडक़र इसे व्यापक बनाया गया और फिर इसका नामकरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर दिया गया। एक बार फिर इसकी अवधि 2020 तक के लिए बढ़ाई गई, लेकिन दूसरी तरफ 2018-19 के लिए एक अन्य वृहद योजना ‘आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन’ के नाम से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। अब इस नई योजना में करीब 10 करोड़ परिवार या 50 करोड़ नागरिकों को पांच लाख रुपए तक स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा और लगभग डेढ़ लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्र स्थापित किए जाएंगे।
लेकिन देश में हर योजना, हर कार्यक्रम नियोजन काल में तो क्रांतिकारी और प्रभावशाली दिखाई देता है, पर क्रियान्वयन स्तर पर पहुंचने के साथ ही दम तोड़ता नजर आता है। इसके मूल में सबसे बड़ा कारण है पर्याप्त धन का नियोजन नहीं किया जाना और नियोजित राशि सही समय पर आवंटित नहीं करना। कई दशकों से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कुल सरकारी व्यय सकल घरेलू उत्पाद का 1 से 1.14 प्रतिशत के मध्य में ही रहा है जो कि दुनिया भर के देशों में स्वास्थ्य पर होने व्यय के लिहाज से बहुत कम है। महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि कम व्यय और सबके लिए स्वास्थ्य, इन दोनों बातों में कोई तालमेल नहीं है। इससे स्थापित व्यवस्था नई प्रक्रिया के दबाव में भंग होती है।
आयुष्मान भारत योजना के लिए डेढ़ लाख उप स्वास्थ्य केन्द्रों को स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्रों में बदला जाना है लेकिन मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे अनेक राज्य, केंद्र के दबाव में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को ही स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्र घोषित कर रहे हैं। इस बदलाव का एक पहलू यह है कि जहां एक ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर न्यूनतम एक एमबीबीएस चिकित्सक आवश्यक है, वहीं स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्र पर इसकी आवश्यकता नहीं है। क्या इस तरह नई योजना को लागू करने के नाम पर स्थापित व्यवस्थाओं के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा रहा है?

Published on:
26 Aug 2018 02:48 pm
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