समत्वशील लीडर सभी परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखते हैं...
समत्व, जिसे संस्कृत में समत्वम् कहा गया है, नेतृत्व के उन गुणों में से एक है जो अत्यंत महत्वपूर्ण होने के बावजूद प्राय: अनदेखा रह जाता है। समत्व का अर्थ है प्रशंसा और आलोचना, सफलता और असफलता, लाभ और हानि जैसी सभी परिस्थितियों में संतुलित बने रहना। समत्वशील लीडर भावनाओं से विमुख नहीं होते, पर वे भावनाओं को अपनी दिशा भी निर्धारित नहीं करने देते। वे अव्यवस्था के बीच शांति, टकराव के बीच स्पष्टता और संकट के बीच संयम बनाए रखते हैं।
भावनात्मक अतियों से मुक्ति: समत्व के अभाव में लीडर किसी भी भाव की 'अति' का सामना करते हैं- जैसे सफलता में अति-उत्साह और असफलता में गहन निराशा। ऐसी अस्थिरता टीम को भ्रमित करती है, निर्णय क्षमता को धुंधला करती है और ऊर्जा को क्षीण करती है। इसके विपरीत, समत्वशील लीडर न तो भावशून्य होते हैं और न ही भावनाओं के वश में कोई निर्णय लेते हैं।
दबाव में बेहतर निर्णय क्षमता: समत्व लीडर को आवेग के बजाय विवेक से निर्णय लेने में समर्थ बनाता है। जब मन भय से आच्छादित नहीं होता और अहंकार से फूला नहीं होता, तब वह स्थितियों, व्यक्तियों और विकल्पों को यथार्थ रूप में देख पाता है।
स्थिर संगठनात्मक संस्कृति का निर्माण: समत्वशील लीडर अपनी टीम को भावनात्मक स्थिरता का अनुभव कराते हैं और उनका संयम दूसरों को भी संयमित रहना सिखाता है।
विजय और पराजय दोनों में समत्व: जब परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, समत्व अहंकार से बचाता है और जब प्रतिकूल होती हैं, तो निराशा से। ऐसे लीडर न प्रशंसा से अत्यधिक प्रभावित होते हैं, न आलोचना से टूटते हैं। वे विनम्रता और दृढ़ता के साथ हर परिस्थिति में भीतर से स्थिर रहते हैं।