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आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक: विकसित भारत की मजबूत नींव

भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ अब आधुनिक चिकित्सा तकनीक में आत्मनिर्भर बनने पर भी जोर दिया जा रहा है।एआइ, रोबोटिक्स और स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से सस्ती, सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की राह मजबूत हो रही है।
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Aug 11, 2026
medical facility
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जगत प्रकाश नड्डा,(केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री)

भारत ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार किया है। सरकारी और निजी क्षेत्र में अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जांच केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है।यह सरकार की ऐसी नीतियों को दर्शाता है, जिनका केंद्र आम नागरिक की स्वास्थ्य सुरक्षा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए काम किया है। इन प्रयासों का परिणाम है कि देश में लोगों द्वारा अपनी जेब से स्वास्थ्य सेवाओं पर किए जाने वाले खर्च में कमी आई है। 65 प्रतिशत से घटकर यह खर्च 43 प्रतिशत रह गया है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत कर रही है। जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जोर आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक क्षेत्र तैयार करने पर है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को और सस्ता, आसानी से उपलब्ध और किसी भी संकट के समय मजबूत बनाना है।
पहले, भारत कई आधुनिक और जटिल चिकित्सा उपकरणों के लिए काफी हद तक दूसरे देशों से होने वाले आयात पर निर्भर था। जिसे देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति, 2023 में देश में ही आधुनिक चिकित्सा उपकरण बनाने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत 50 से अधिक आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का देश में उत्पादन शुरू हो चुका है। साथ ही, इस क्षेत्र में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। ये उपलब्धियां बताती हैं कि भारत धीरे-धीरे दुनिया के चिकित्सा तकनीक क्षेत्र में भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभर रहा है। भारत तेजी से आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपना भी रहा है, ताकि लोगों का जीवन बेहतर बनाया जा सके।


भारत का विश्व स्तर पर पहचान बना चुका दवा उद्योग, मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता, तेजी से फैलता डिजिटल ढांचा, तेजी से बढ़ता नए उद्यमों का क्षेत्र और कुशल मानव संसाधन अगली पीढ़ी की चिकित्सा तकनीक विकसित करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। एआइ, चिकित्सा उपकरण के रूप में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर, इंटरनेट से जुड़े चिकित्सा उपकरण, रोबोट आधारित तकनीक और दूर से जांच जैसी नई तकनीकों में भारत के पास देश और दुनिया की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए नए समाधान विकसित करने के बड़े अवसर हैं। जैसे-जैसे भारतीय कंपनियां दुनिया के बाजार में विस्तार कर रही हैं, गुणवत्ता भी भारत में बने चिकित्सा उपकरणों की सबसे बड़ी पहचान बनती जा रही है। सरकार नियामक व्यवस्था को मजबूत करने, मान्यता प्राप्त जांच सुविधाओं का विस्तार करने, चिकित्सा उपकरणों की प्रभावशीलता से जुड़े वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने पर जोर दे रही है।
इससे मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता भी मजबूत होगी। सरकार ऐसी स्थिर और पारदर्शी नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनसे शोध, निवेश, तकनीकी साझेदारी और कारोबार करना आसान हो। भारत का चिकित्सा तकनीक क्षेत्र एशिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार है और दुनिया के शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है। फिलहाल इसका आकार 15 से 16 अरब डॉलर है और यह करीब 12 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहा है। इस वजह से यह देश के सबसे तेजी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्रों में से एक बन गया है। विकसित भारत का लक्ष्य गुणवत्ता, नए आविष्कार और सभी को साथ लेकर चलने के आधार पर दुनिया में नेतृत्व करने पर जोर देता है।
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि नई चिकित्सा तकनीकें भारत की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करें। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना और बेहतर स्वास्थ्य के लिए भारत को दुनिया के भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करना है।

Updated on:
11 Aug 2026 05:25 pm
Published on:
11 Aug 2026 05:25 pm