ओपिनियन

Social Media Impact on Spending: सोशल मीडिया के प्रभाव की वजह से आर्थिक व्यवहार में बदलाव

इस दौर में महंगाई खुदरा स्तर पर पांच फीसदी पर दर्ज की गई है। इससे ये स्पष्ट है कि व्यक्ति के लिए सालाना वेतन से खर्चों का भुगतान करने की क्षमता चार फीसदी कम रही है, इसलिए वह पर्सनल लोन पर निर्भर होता जा रहा है।

3 min read
Feb 26, 2026

डॉ. पी.एस. वोहरा - आर्थिक मामलों के जानकार,

ये अक्सर चर्चा होती है कि सोशल मीडिया ने जीवन जीने के तकरीबन सब तरीकों को बदलकर रख दिया है, जिनमें परिवार में होते हुए भी घरेलू न हो पाना, बच्चों में गलत आदतों का आना इत्यादि रोज हमारे आसपास देखा, पढ़ा और सुना जाता है। इन सबके अलावा अब सोशल मीडिया व्यक्ति की आर्थिक आदतों को भी बड़ी तेजी से बदल रहा है। मध्यमवर्गीय परिवारों का एक बहुत बड़ा तबका सोशल मीडिया की रील्स, वीडियो और बड़े लोगों के स्टेटस की तस्वीरों से प्रभावित होकर कुछ-कुछ स्तर तक विलासिता के तरीकों को अपने जीवन में प्रवेश दे रहा है।

आरबीआइ की एक ताजा रिपोर्ट के आंकड़े इस बात की प्रस्तुति देते हैं कि भारत में गैर-आवासीय खुदरा ऋण, जिसे मुख्यत: व्यक्तिगत ऋण या पर्सनल लोन की श्रेणी में सम्मिलित किया जाता है, पिछले 5 सालों में तीन गुना बढ़ गए हैं और वर्तमान समय में बैंकिंग क्षेत्र के कुल ऋणों में 56 प्रतिशत की हिस्सेदारी रख रहे हैं। ताज्जुब करने वाली बात यह है कि इन ऋणों का 46 फीसदी हिस्सा विभिन्न तरह के उपभोग के लिए मध्यमवर्गीय परिवारों के जरिये लिया जा रहा है, जबकि मात्र 36 फीसदी हिस्सा विभिन्न संपत्तियों के निर्माण के लिए।

एक कंपनी के सर्वे में ये बात सामने आई है कि उपभोग के अंतर्गत सबसे ज्यादा हिस्सेदारी, जो तकरीबन एक चौथाई से अधिक है, वह मध्यमवर्गीय व्यक्ति के जरिये विभिन्न हिल-स्टेशंस पर यात्रा, विभिन्न संगीत कार्यक्रमों या कंसर्ट में भागीदारी इत्यादि पर हो रही है। उसके बाद की प्राथमिकता में घर की मरम्मत, मेडिकल इमरजेंसी इत्यादि है। और तो और क्रेडिट कार्ड के ऋण के भुगतान का हिस्सा भी 10 फीसदी से अधिक है, जो बहुत आश्चर्यचकित करता है।

इन सब के बीच ये सब इस बात की गवाही भी देते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में भारत में नकदी का प्रवाह बहुत अधिक बना हुआ है और वह भारतीयों की उपभोग क्षमता को बढ़ाने में योगदान भी दे रहा है। यकीनन इसके पीछे पिछले वित्तीय वर्ष के बजट में दी गई आयकर की सीमा में बढ़ोतरी, अक्टूबर के मध्य में हुआ जीएसटी कट और इन सब के साथ में आरबीआइ के जरिये वर्ष 2025 में 1.25 प्रतिशत की कटौती शामिल है।

लेकिन इस पक्ष पर आरबीआइ की चिंता का सबब यह है कि भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार में ऋण के भुगतान के लिए मानक के रूप में उपयोग किए जाने वाले सिबिल स्कोर में बड़ा बदलाव आ रहा है। रिपोर्ट के अंतर्गत प्राइम श्रेणी 731 से 900 अंकों के मध्य रहती है, जिसमें सबसे ऊपर की श्रेणी को सुपर प्राइम के तौर पर रखा जाता है, जहां पर व्यक्ति का वित्तीय स्कोर 791 से 900 तक होता है। उसके नीचे प्राइम प्लस की श्रेणी होती है, जिसे 771 से 790 तक आंका जाता है और प्राइम की श्रेणी 731 से 770 तक वर्गीकृत है।

44 प्रतिशत भारतीय अधिक ब्याज की दरों से भारतीय बैंकों को ऋण भुगतान कर रहे हैं। अब इसमें जोखिम यह भी है कि अगर वे विफल होते हैं तो उनकी विफलता का फंदा बैंकिंग क्षेत्र पर भी जाता है और उसका संकट अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता ही है। अब इस बात पर सचेत होना इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि वर्तमान समय में व्यक्तिगत ऋण का 40 प्रतिशत उपभोग के लिए लिया जा रहा है, जिसमें प्राइम श्रेणी में 67 प्रतिशत सम्मिलित हैं। बाकी हिस्सा प्राइम श्रेणी से नीचे की श्रेणियों में आ रहा है, जिसे बैंकों के लिए एक अलार्म के रूप में समझना बहुत जरूरी है।

इस रिपोर्ट का एक सकारात्मक आंकड़ा यह भी है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में घरेलू बचत, जो पिछले 50 सालों में सबसे कम होकर जीडीपी के 4 प्रतिशत से नीचे चली गई थी, वह अब जीडीपी के 7.6 प्रतिशत पर दर्ज हुई है। वहीं, एक वित्तीय रिसर्च कंपनी की रिपोर्ट ये भी बताती है कि निफ्टी 50 के अंतर्गत सम्मिलित होने वाली सभी कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या में वर्ष 2016 से 2025 के अंतर्गत औसतन वेतन बढ़ोतरी प्रति व्यक्ति मात्र एक फीसदी की हुई है, जबकि इस दौर में महंगाई खुदरा स्तर पर पांच फीसदी पर दर्ज की गई है।

इससे ये स्पष्ट है कि व्यक्ति के लिए सालाना वेतन से खर्चों का भुगतान करने की क्षमता चार फीसदी कम रही है इसलिए वह पर्सनल लोन पर निर्भर होता जा रहा है। भारतीयों के पास इमरजेंसी फंड भी कम होते जा रहे हैं, जो भारतीय समाज में व्यक्तिगत आत्मनिर्भरता के लिए हमेशा से प्राथमिकता में रहा करता था, जिसका उपयोग रोगों से लेकर घर बनाने व संतान की शादी पर एक सहारे के रूप में किया जाता था।

Published on:
26 Feb 2026 03:19 pm
Also Read
View All

अगली खबर