
सुगठित शहरी नियोजन के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित पारगमन-उन्मुख विकास, भूमि पूलिंग और मिश्रित भूमि उपयोग को अपनाना आवश्यक है। इससे आवास, कार्यस्थल और परिवहन के बीच संतुलन बनता है। कुशल सार्वजनिक परिवहन, जल संरक्षण, हरित क्षेत्र और आधुनिक तकनीक के उपयोग से शहर अधिक टिकाऊ और रहने योग्य बन सकते हैं। साथ ही, प्रशिक्षित नगर नियोजन विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाना और नीतिगत निर्णयों में जनभागीदारी सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। - योगेश स्वामी, सूरतगढ़
बढ़ती जनसंख्या और अनियोजित विस्तार ने शहरी सुविधाओं पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में मास्टर प्लान का कड़ाई से पालन आवश्यक है। सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ कर निजी वाहनों पर निर्भरता कम की जानी चाहिए। हरित क्षेत्र, पार्क और जलस्रोतों का संरक्षण अनिवार्य हो। किफायती आवास योजनाएं झुग्गी समस्या को कम कर सकती हैं। ठोस कचरा प्रबंधन और स्वच्छता में तकनीक का उपयोग किया जाए। पारदर्शिता और जनसहभागिता से ही शहर सुव्यवस्थित और स्वच्छ बन सकते हैं। - रोहित सोलंकी, नर्मदापुरम
सुगठित शहरी नियोजन के लिए मास्टर प्लान का सख्ती से पालन और अनियंत्रित निर्माण पर रोक जरूरी है। पर्याप्त हरित क्षेत्र, सुचारु यातायात व्यवस्था और मजबूत जल निकासी प्रणाली शहर की आधारभूत आवश्यकताएं हैं। नागरिक सुविधाओं का संतुलित विकास और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी के बिना शहरों को व्यवस्थित और रहने योग्य नहीं बनाया जा सकता। - राकेश खुडिया, श्री गंगानगर
किसी भी सुगठित शहर की नींव स्वच्छता है। यदि सफाई व्यवस्था सुदृढ़ और नियमित होगी, तो अन्य व्यवस्थाएं भी सुचारु रूप से संचालित होंगी। कचरा प्रबंधन, सीवर प्रणाली और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। स्वच्छ वातावरण न केवल स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि यह सुव्यवस्थित शहरी जीवन का आधार भी है। - प्रियव्रत चारण, जोधपुर
सुगठित शहरी नियोजन का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना होना चाहिए। इसके लिए योजनाएं बनाने वाले विशेषज्ञों का प्रशिक्षित और योग्य होना आवश्यक है। भूमि का वैज्ञानिक उपयोग, पर्याप्त संसाधन और प्रभावी स्थानीय शासन अनिवार्य हैं। साथ ही, जनसहभागिता सुनिश्चित कर ही संतुलित और विकसित शहरों की परिकल्पना साकार की जा सकती है। - निर्मला वशिष्ठ, अलवर
शहरों में भूमि का उचित उपयोग और सुव्यवस्थित सड़कें शहरी नियोजन की पहली शर्त हैं। मजबूत सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन तथा जल और बिजली की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप आवास और अन्य सुविधाओं की अग्रिम योजना जरूरी है। पार्क और हरित क्षेत्रों का विकास शहरों को स्वस्थ और संतुलित बनाता है। - रविन्द्र वर्मा, रतलाम
सुगठित शहरी नियोजन के लिए दीर्घकालिक मास्टर प्लान आवश्यक है, जिसमें जनसंख्या और संसाधनों का संतुलित उपयोग हो। सुव्यवस्थित सड़क और परिवहन व्यवस्था, जल संरक्षण तथा ठोस कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। डिजिटल तकनीक आधारित स्मार्ट समाधान और किफायती आवास योजनाएं लागू की जाएं। पारदर्शी प्रशासन और नागरिक सहभागिता से ही सुरक्षित और समृद्ध शहरों का निर्माण संभव है। - संजय माकोड़े, बैतूल
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच मिश्रित भूमि उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि आवास और कार्यस्थल के बीच दूरी कम हो। एकीकृत सार्वजनिक परिवहन और साइकिल ट्रैक से प्रदूषण और यातायात दबाव घटाया जा सकता है। 'स्पंज सिटी' जैसी अवधारणाओं के तहत जल निकायों और पार्कों का संरक्षण आवश्यक है। जीआइएस मैपिंग और समावेशी आवास नीति अपनाकर टिकाऊ और सुरक्षित शहर विकसित किए जा सकते हैं। - राकेश बिश्नोई, बाड़मेर
सशक्त शहर की पहचान योजनाबद्ध विकास से होती है। मास्टर प्लान का प्रभावी क्रियान्वयन, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा तथा पैदल और साइकिल मार्गों का विकास आवश्यक है। वर्षा जल संचयन, हरित पट्टियों का विस्तार और जल संरक्षण से पर्यावरण संतुलन बना रहता है। झुग्गी पुनर्वास, किफायती आवास और तकनीक आधारित यातायात प्रबंधन से जीवन सुगम होता है। जवाबदेह प्रशासन और जनभागीदारी आदर्श शहर की आधारशिला हैं। - इशिता पाण्डेय, कोटा
Published on:
25 Feb 2026 04:24 pm
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