
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों से लोग बिजली बिल को लेकर काफी परेशान हैं। घरेलू बिजली बिल दो से तीन गुना तक ज्यादा आ रहा है। बिजली उपभोक्ताओं का कहना है कि जब से उनके घरों में स्मार्ट मीटर लगाया गया है, तब से बिजली बिल भारी-भरकम आने लगा है। प्रदेशभर में करीब-करीब सभी बिजली उपभोक्ता इसकी शिकायत लगातार कर रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई होती नहीं दिख रही है।
स्मार्ट मीटर सिस्टम केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में देशभर में लागू करने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारना तथा उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है। प्रदेश में पिछली सरकार ने 2022 में इसे लागू करने का निर्णय लिया और इसके लिए टेंडर व कार्यादेश जारी किया था। प्रदेश में फरवरी 2024 से स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ हुआ। प्रदेश में लगभग 55 लाख विद्युत उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाया जाना है। सरकार के मुताबिक करीब 40 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटर लगवाने के लिए उसके कई फायदे भी गिनाए गए, जैसे कि स्मार्ट मीटर से बिजली खपत का आंकड़ा हर 30 मिनट में मिल जाता है, मीटर रीडर द्वारा गलत रीडिंग की आशंका समाप्त हो जाती है और बिलिंग अधिक सटीक होती है।
अब जिनके घर बिजली के स्मार्ट मीटर लग गए, तो बिजली के इस स्मार्ट मीटर ने उपभोक्ताओं को अपनी स्मार्टनेस दिखानी शुरू कर दी। जिन लोगों के यहां पहले 1500 से 2000 रुपए मासिक बिजली बिल आता था, अब औसतन 4000 से 5000 रुपए का बिल आने लगा है। भारी भरकम बिजली बिल से त्रस्त आम मध्यम वर्गीय लोग अब स्मार्ट मीटर को सरकारी खजाना भरने वाला यानी कि 'कमाऊपुत्र' कहने लगे हैं। सरकार को चाहिए कि स्मार्ट मीटर को लेकर आम लोगों की जो शिकायत और परेशानी है, उसके समाधान के लिए संवेदनशीलता के साथ पहल करे।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com