
छत्तीसगढ़ में हाल ही में नए मेडिकल कॉलेज खुलने के साथ ही नए और पुराने मेडिकल कॉलेजों में सीटें भी बढ़ाई गई हैं। प्रदेश को आगामी पांच वर्ष में 2925 नए डॉक्टर मिलेंगे, जो यहीं के मेडिकल कॉलेजों से पढ़कर निकले होंगे। यह सुखद खबर इस मायने में भी है कि प्रदेश में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ जाएगी।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय 1 नवंबर 2000 की तरफ देखें, तो तब प्रदेश में इकलौता रायपुर का नेहरू मेडिकल कॉलेज था, जोकि अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से ही था। यहां 100 सीटें थीं। सरकारों के प्रयासों से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा उछाल आया। हाल ही में प्रदेश को 5 सरकारी और 1 निजी मेडिकल कॉलेज मिले हैं। इसके साथ ही इन 26 वर्षों में प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 21 हो गई, जिनमें 15 मेडिकल कॉलेज सरकारी और 6 मेडिकल कॉलेज निजी हैं। मेडिकल की कुल सीटें भी 100 से बढ़कर अब 2925 हो गई हैं।
नए मेडिकल कॉलेज खोलने और सीटों में वृद्धि करने की यह कवायद जनसंख्या के हिसाब से डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए है। क्योंकि प्रदेश में जनसंख्या के हिसाब से डॉक्टरों की उपलब्धता बहुत ही कम है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में डॉक्टर-जनसंख्या का राष्ट्रीय अनुपात 1:811 है, वहीं छत्तीसगढ़ में 1:2492 है। प्रदेश का यह आंकड़ा चिंताजनक है। नए मेडिकल कॉलेज खुलने और सीटों के बढ़ने से भविष्य में कुछ हद तक इस चिंता का निराकरण हो जाएगा।
इन सबके अलावा भी सरकार के सामने कुछ चुनौतियां हैं। ये हैं मेडिकल कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन-अध्यापन की। इन मेडिकल कॉलेजों से अच्छे डॉक्टर तभी मिल सकेंगे, जब वहां अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर हो और टीचिंग स्टाफ भी पर्याप्त हो। मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो सरकार का पूरा फोकस क्वालिटी एजुकेशन पर होना चाहिए। मेडिकल छात्रों को जब अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, अच्छी फैकल्टी और क्वालिटी एजुकेशन मिलेगा, तभी भविष्य में वे प्रदेश की सेहत ठीक कर सकेंगे।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
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Updated on:
17 Jul 2026, 2:56 AM IST
Published on:
17 Jul 2026, 2:55 AM IST
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