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चिकन नेक पर मंडराता खतरा, बढ़ी रणनीतिक चिंता

अब इस फैक्टरी के जरिये बांग्लादेश को तुर्किये के एडवांस एयरोस्पेस इकोसिस्टम और रक्षा सहयोग का सीधा फायदा मिलेगा। 25 हजार करोड़ रुपए का यह मेगा प्रोजेक्ट बांग्लादेश की रक्षा नीति, आत्मनिर्भरता और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
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Oct 09, 2026
chicken neck
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पड़ोसी बांग्लादेश ने भारत की सुरक्षा चिंता बढ़ा दी है। पिछले दिनों बांग्लादेश ने मध्यपूर्व के प्रमुख इस्लामिक राष्ट्र तुर्किये के सहयोग से बोगुरा में एक जॉइंट-वैंचर ड्रोन फैक्टरी स्थापित करने की योजना बनाई है। फैक्टरी बांग्लादेश के उत्तरी हिस्से में स्थित बोगुरा एयरबेस के पास बनाने की योजना है। भारत की चिंता का कारण है कि यह भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण सिलीगुडी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद नजदीक है। इस संवेदनशील क्षेत्र के पास सैन्य ड्रोन की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को स्थापित किया जाना सुरक्षा की दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। मीडिया रिपोट्र्स में बताया जा रहा है कि चीन की सरकारी कंपनी (सीईटीसी इंटरनेशनल) भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है। भारत पहले से ही पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे तुर्किये और चीन निर्मित ड्रोनों से मिल रही चुनौतियों का सामना कर रहा है। अब पूर्वी सीमा पर भी खतरे का एक ओर द्वार खुल जाएगा।

बोगुरा एयरबेस के पास प्रस्तावित फैक्टरी भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 75 किलोमीटर दूर है। ऐसे में बांग्लादेश से अनधिकृत ड्रोनों की घुसपैठ की आशंका बढ़ जाएगी। ड्रोनों का इस्तेमाल सीमापार से हथियारों, नकली नोटों और ड्रग्स की तस्करी के लिए भी किया जा सकता है। बांग्लादेश पहले से ही तुर्किये के बायरक्तार टीबी-2 ड्रोनों का इस्तेमाल कर रहा है। यूक्रेन और अजरबैजान के युद्धों में इन ड्रोनों ने अपनी ताकत का परिचय दुनिया को दिया। अब इस फैक्टरी के जरिये बांग्लादेश को तुर्किये के एडवांस एयरोस्पेस इकोसिस्टम और रक्षा सहयोग का सीधा फायदा मिलेगा। 25 हजार करोड़ रुपए का यह मेगा प्रोजेक्ट बांग्लादेश की रक्षा नीति, आत्मनिर्भरता और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अपने देश की भूमि पर बनाए जाने वाले ड्रोन का उपयोग बांग्लादेश अपनी सेना के लिए तो करेगा ही, साथ ही यहां निर्मित ड्रोन इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे पूर्वी एशियाई देशों को निर्यात किए जाने की योजना है। भारत की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि तुर्किये ने इसी तरह की ड्रोन इकाइयां पाकिस्तान के अटोक, चारियान और कराची में भी स्थापित की है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस तरह से तुर्किये ने पाकिस्तान की मदद के लिए उन्नत सैन्य ड्रोन और ड्रोन संचालन में मदद के लिए अपने ड्रोन ऑपरेटर भेजे, उसे देखते हुए पूर्वी मोर्चे पर तुर्किये की ड्रोन तकनीक की मौजूदगी नए खतरे का संकेत है। दूसरा इस खेल में केवल तुर्किये ही नहीं, चीन भी शामिल है। जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है कि चीन की सरकारी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (सीईटीसी) के साथ भी बांग्लादेश ने ड्रोन असेंबल प्लांट के लिए एक बड़ा समझौता किया है। 608 करोड़ टका (लगभग 50 मिलियन डॉलर) के इस समझौते के तहत सीईटीसी बांग्लादेश के चटगांव और मीरशराई में एक्स वाय-वन ड्रोन का निर्माण करेगी। चटगांव बांग्लादेश का प्रमुख तटीय शहर एवं व्यापारिक राजधानी है। तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के समय चीन के साथ इस संवदेनशील प्रोजेक्ट का समझौता हुआ था।

समझौते का एक अहम पहलू यह है कि इस समझौते के तहत चीन को जो 850 एकड़ भूमि आवंटित कि गई है, यह वही भूमि है, जो पहले भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के लिए आवंटित की गई थी जिसे बाद में बांग्लादेश सरकार ने रद्द कर चीन को सौंप दिया था। चटगांव मीरशराई में चीनी निवेश से बनने वाली ड्रोन सुविधाओं का सीधा असर बंगाल की खाड़ी के सुरक्षा ढांचे पर भी पड़ेगा। इस समुद्री क्षेत्र में भारत के महत्वपूर्ण नौसैनिक ठिकाने ओर मिसाइल टेस्टिंग रेंज है। चीनी तकनीक से लैस ड्रोनों की मौजूदगी भारत की समुद्री सुरक्षा और सर्विलांस गतिविधियों को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगी। इसके अलावा सीमा स्थित दुर्गम इलाकों में कम आवाज वाले आधुनिक जासूसी ओर टोही ड्रोन के जरिये भारत की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखे जाने की आशंका भी बढ़ जाएगी। सिलीगुडी कॉरिडोर भारत के मुख्य भू-भाग को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोडऩे वाला एकमात्र संकरा जमीनी रास्ता है। ऐसे में इस क्षेत्र के पास आधुनिक सैन्य ड्रोन की मैन्युफैक्चरिंग और तैनाती से युद्ध या तनाव की स्थिति में भारत की लाइफलाइन सिलीगुडी कॉरिडोर की निगरानी और उस पर सटीक हमले की क्षमता पड़ोसी देश के पास आ जाएगी।

दरअसल, बांग्लादेश में तख्तापलट और सत्ता परिर्वतन के बाद से ढाका का झुकाव उन ताकतों की तरफ बढ़ा है, जो रणनीति रूप से भारत के प्रतिद्वंद्वी माने जाते है। हालांकि भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को पटरी पर लाने के लिए भरसक प्रयास कर रहा है। रहमान की भारत यात्रा अभी ठंडे बस्ते में है। भारत उन्हें दिल्ली आने का न्योता दे चुका है, पर रहमान सरकार पूर्व पीएम शेख हसीना के मुद्दे पर अभी तक अपना रुख नई दिल्ली से अलग बनाए हुए है। जिस तरह से बांग्लादेश रणनीतिक रूप से भारत के प्रतिद्वंद्वियों चीन और तुर्किये की मदद से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है व सीईटीसी जिस तरह से इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनी है, उससे पूर्वी मोर्चे पर चुनौतियों का नया द्वार खुलता हुआ दिखाई दे रहा है।

डॉ. एन.के. सोमानी, (अंतरराष्ट्रीय विषयों के जानकार)

Updated on:
09 Oct 2026 05:39 pm
Published on:
09 Oct 2026 05:39 pm