ओपिनियन

पारदर्शिता कहां?

नागरिकता जांच की व्यवस्था इतनी सुदृढ़ और पारदर्शी हो कि कोई भी विदेशी अवैध रूप से देश में प्रवेश नहीं कर सके। यदि आ भी जाए तो पकड़ा जाए।

2 min read
Oct 03, 2017
retired army officer mohd azmal haque

हमारा देश विडंबनाओं से भरा है। प्रशासनिक हलकों में खामियां इतनीं कि कोई एक मुद्दे् पर अुनसंधान करने निकले तो तह तक पहुंचने में कई जन्म लेने पड़ जाएं। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती हे कि देश की सेना में ३० वर्ष तक सेवा करने वाले मोहम्मद अजमल हक से विदेशी नागरिकों से संबंधित ट्रिब्यूनल ने कहा है कि वे अपनी नागरिकता साबित करें।

ट्रिब्यूनल को शक है कि हक बांग्लादेशी हैं और अवैध रूप से भारत में बस गए। जूनियर कमिशंड ऑफिसर रेंक से ३० सितंबर २०१६ को सेवानिवृत हक असम में रहते हैं। उन्हें १३ अक्टूबर को ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होकर भारत का नागरिक होने का सबूत पेश करने को कहा गया है। २०१२ में भी उन्हें इस प्रकार का नोटिस मिला था। वे ट्रिब्यूनल के सामने अपनी नागरिकता सिद्ध कर चुके थे। अब फिर उन्हें उसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह सही है कि सरकार को अवैध रूप से भारत में बसे विदेशी नागरिकों की पड़ताल करनी चाहिए।

ये भी पढ़ें

टेररिस्तान!

रोहिंग्या विवाद के बाद इसमें तेजी भी आयी है। लेकिन क्या देश की रक्षा में जीवन के ३० साल देने के बाद किसी से यह पूछना वाजिब है कि वह खुद को मूल नागरिक साबित करे? अगर मान लें कि वह इसमें विफल रहता है तो फिर सेना जैसी अतिविशिष्ट सेवा में भर्ती घोटाले की पोल नहीं खुलती? कैसे बिना मिलीभगत के कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इतनी महत्वपूर्ण सेवा में जा सकता है? हक के अलावा और न जाने कितने लोग होंगे जो इस प्रकार सेना के अलावा अन्य सेवाओं में घुसकर देश को नुकसान पहुंचा चुके होंगे या पहुंचा रहे होंगे।

सरकार को अपने सिस्टम की छानबीन पहले करनी चाहिए। विशेष रूप से भर्तियों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगना चाहिए। नागरिकता जांच की व्यवस्था इतनी सुदृढ़ और पारदर्शी हो कि कोई भी विदेशी अवैध रूप से देश में प्रवेश नहीं कर सके। यदि आ भी जाए तो पकड़ा जाए। सरकारी सेवाओं में तो किसी भी सूरत में प्रवेश नहीं कर पाए। आखिर देश की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं होता। यदि हक वाकई बांग्लादेशी है तो पहले कार्रवाई उन पर हो जिन्होंने उसे बिना जांच के सेना में प्रवेश दिया अन्यथा हक के सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों पर कार्रवाई हो।

ये भी पढ़ें

कल्पना जगत और हम
Published on:
03 Oct 2017 12:47 pm
Also Read
View All