
pakistan army
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत किसी और पर सटीक बैठती हो या नहीं लेकिन पाकिस्तान पर तो सौ फीसदी सही साबित होती है। संयुक्त राष्ट्र की सालाना बैठक हो या फिर कोई और मौका, पाकिस्तान कश्मीर राग अलापने से बाज नहीं आता। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा। उसकी चिंता करने की जरूरत पाकिस्तान को नहीं है। भारत पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाने वाले पाकिस्तान को अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए।
कहता है कि भारत कश्मीर में लोगों के संघर्ष को कुचलने के साथ पाकिस्तान में आतंककारी गतिविधियों को संचालित कर रहा है। अपने पाप छुपाने के लिए पाकिस्तान लम्बे समय से ये नाकाम हथकण्डा अपनाने की कोशिशों में जुटा है। भारत हर बार संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी झूठ की बखिया उधेड़ता रहा है। इस बार भी भारतीय प्रतिनिधि ने पलटवार करते हुए पाकिस्तान को ‘टेररिस्तान’ करार दे डाला। आतंक के जीते-जागते गढ़ को और नाम भी क्या दिया जाए?
अब तो दुनिया भी पाकिस्तान की असलियत जान चुकी है। अमरीका उसे अलग-थलग करने में जुटा है तो दूसरे देश भी उससे दूरी बनाने लगे हैं। दुर्दांत आतंकवादियों में शुमार आतंककारी पाकिस्तान में राजनीतिक दल बनाकर चुनाव तक लडऩे लगे हैं। भारत पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाने वाले पाकिस्तान को अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए। उसकी सेना किस तरह बलूचिस्तान में निहत्थे लोगों पर अत्याचार कर रही है। इधर-उधर झांकने की बजाए पाकिस्तान अपना घर संभाले।
कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा। उसकी चिंता करने की जरूरत पाकिस्तान को नहीं है। मानवाधिकारों के बारे में भारत को पाकिस्तान से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान नहीं सुधरा तो वह दिन दूर नहीं, जब गृहयुद्ध की आग में जलकर वह खाक हो जाए। बलूचिस्तान में फैल रही बगावत की चिंगारी ही आग में बदल सकती है।
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