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ट्रैववलॉग अपनी दुनिया : प्रकृति की खूबसूरती और सुकून है लंढौर में

travellog : लंढौर को लेकर कई तरह के सवाल होंगे। जैसे कि यह जगह जब मसूरी के एकदम पास है, तो ऑफबीट कैसे हुई? इसे 'माउंटेन ऑफ पैराडाइज' क्यों कहा जाता है?

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ट्रैववलॉग अपनी दुनिया : प्रकृति की खूबसूरती और सुकून है लंढौर में

संजय शेफर्ड (ट्रैवल ब्लॉगर)

लंढौर (landour) मसूरी (Mussoorie) से सिर्फ पांच किलोमीटर दूर है, लेकिन इसकी दूरी का असल अंदाजा इस जगह पर चलकर आने वाले लोगों को ही होता है। खासकर ट्रैकिंग के आखिरी तीन किलोमीटर, जिन्हें हम एक बाजार और कुछ संकरी गलियों से होकर तय करते हैं। थकान कदमों से होते हुए कब पूरी देह में फैल जाती है, पता ही नहीं चलता। खूबसूरती ऐसी कि इंसान अपनी सारी की सारी पीड़ा भूल जाए। कोई एक बार इस जगह को देख ले, तो वह लौटना नहीं चाहे। आखिर कोई तो बात रही होगी कि रस्किन बॉन्ड जैसे विश्व प्रसिद्ध लेखक यहीं के होकर रह गए। इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए मैं दिल्ली से लंढौर आया था और जवाब मिला भी।

लोगों के मन में मेरी तरह ही लंढौर को लेकर कई तरह के सवाल होंगे। जैसे कि यह जगह जब मसूरी के एकदम पास है, तो ऑफबीट कैसे हुई? इसे 'माउंटेन ऑफ पैराडाइज' क्यों कहा जाता है? या फिर यह कि इसे 'दी पीनट बटर कैपिटल ऑफ इंडिया' क्यों कहा जाता है? सवाल यह भी हो सकता है कि आखिर इस जगह पर क्यों जाया जाए? मेरी तरह आपको भी इस जगह पर आकर अपने हर एक सवाल जवाब मिलेगा। बस आपको करना यह होगा कि आप दिल्ली से बस, ट्रेन या प्लेन पकड़कर देहरादून पहुंच जाएं। देहरादून से लंढौर की कुल दूरी तकरीबन 35 किलोमीटर है, जिसे आप कार या फिर टैक्सी से पूरी कर सकते हैं। आप चाहें तो देहरादून से मसूरी पहुंच जाएं। फिर ट्रैकिंग या फिर टैक्सी लेकर लंढौर। लंढौर अपनी बसावट और भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से बाकी दुनिया से एकदम अलग है। ब्रिटिशकालीन पुरानी इमारतें, देवदार के खूबसूरत पेड़, शुद्ध हवा, चर्च, कैफे और जिंदगी की धीमी रफ्तार। इस छोटे से कस्बे के इतिहास पर अगर नजर दौड़ाई जाए, तो यह वही जगह है, जहां नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच गोरखा जंग छिड़ी थी। इस जगह पर ब्रिटेन का काफी दबदबा रहा, जिसका प्रभाव आज भी दिखाई देता है।

लंढौर को लोग 'माउंटेन ऑफ पैराडाइज' कहते हैं। यदि आप जगहों को देखने और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में दिलचस्पी रखते हैं, तो सच मानिए यह जगह आपके लिए ही है। इस जगह की हवा में जो बात है, वह मुझे कहीं दूसरी जगह नहीं मिलती। पैन केक हो, आमलेट अथवा जिंजर लेमन टी मुझे इस जगह से ज्यादा अच्छी कहीं और नहीं मिली। पसंदीदा जिंजर लेमन टी पीकर शाम ढलते-ढलते लंढौर की सड़कों पर निकल गया। ठहरने के लिहाज से लंढोर थोड़ा महंगा है, लेकिन लंढोर बाजार में आपको सस्ते और अच्छे विकल्प अवश्य मिल जाएंग।

Published on:
31 Aug 2021 01:44 pm
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