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सजग संपादक, चिंतक व लोकचेतना के प्रणेता, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के दीप स्तंभ थे कुलिश जी: गजेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश के जन्मशती वर्ष के मौके पर उनसे जुड़े संस्मरण साझा किए हैं केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने।
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जयपुर

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Akshita Deora

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Updated: 20 Jan 2026, 1:48 PM IST

Gajendra Singh Shekhawat

केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (फोटो: पत्रिका)

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश के जन्मशती वर्ष के मौके पर उनसे जुड़े संस्मरण साझा किए हैं केन्द्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने। अपना राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू करने वाले गजेन्द्र सिंह शेखावत लगातार तीसरी बार जोधपुर से लोकसभा के लिए चुने गए हैं। वे इससे पूर्व केन्द्र में जलशक्ति मंत्री भी रह चुके हैं। शेखावत का कहना है कुलिश जी ने अपने आलेखों में सत्ता को आईना दिखाते हुए आमजन को सशक्त करने के प्रयासों को लेकर कलम चलाई।

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश जी की लेखनी से मेरा परिचय छात्र जीवन के दौरान ही खूब हुआ। में उन दिनों जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर का छात्र था। अक्सर राजस्थान पत्रिका में कुलिश जी के समसामयिक विषयों से जुड़े आलेख पढ़ने को मिलते थे जो निर्भीक व विचारोत्तेजक होते थे। कुलिश जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। सही मायने में वे केवल एक सजग संपादक ही नहीं थे, बल्कि समाज सुधारक, चिंतक, लोकतंत्र के जागरुक प्रहरी और लोक चेतना के प्रणेता थे।

उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समय-समय पर सत्ता को आईना दिखाने का साहस किया। उनकी नजर में सदैव आमजन ही रहते थे। इसीलिए सदैव आमजन को सशक्त बनाने के प्रयासों में जुटे रहते थे। सात मार्च 1956 को कुलिश जी ने राजस्थान पत्रिका के नाम से जिस समाचार पत्र की शुरुआत की उसके जरिए समाज को दिशा देने वाला एक ऐसा आंदोलन खड़ा किया, जिसने पत्रिका को लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी बनाने का काम किया। राजस्थान पत्रिका को कुलिश जी ने सत्य और निष्पक्षता का प्रतीक बनाया। यही कारण रहा कि यह अखबार सदैव आम जनता की आवाज बनकर खड़ा रहा और आज भी अपना यह दायित्व बखूबी निभा रहा है। कुलिश जी समाचार पत्रों को केवल खबरें देने का माध्यम ही नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का आंदोलन खड़ा करने का जरिया मानते थे।

पत्रिका के सामाजिक सरोकारों में सामाजिक चेतना के ऐसे ही प्रयासों की झलक देखने को मिलती है। कुलिश जी ने राजनीति से लेकर लोकनीति और धर्म-अध्यात्म से लेकर वेद-विज्ञान हर क्षेत्र पर अधिकार के साथ कलम चलाई। यह उनकी बहुमुखी प्रतिभा का परिचायक था। पत्रकारिता के संदर्भ में कुलिश जी सदैव यह मानते थे कि पत्रकारिता केवल खबरें संकलित करना और उन्हें प्रकाशित करना ही नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी जनमानस की समस्याओं को उठाने के साथ अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने की भी है।

अखबार के जरिए समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए इसका भी वे ध्यान रखते थे। उनके लिए एक वाक्य में कहा जाए तो यही कहूंगा कि कुलिश जी निष्पक्ष व निर्भीक पत्रकारिता के दीपस्तंभ दीपस्तंभ थे। उन्होंने सदैव यही कहा कि भारत की शक्ति उसकी जनता और उसकी संस्कृति में है। पत्रकारिता हो या राजनीति, दोनों का उद्देश्य समाज की सेवा होना चाहिए। उनके विचार और आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

कुलिश जी का नाम केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारत की पत्रकारिता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। कुलिश जी की पत्रकारिता ने लोकतंत्र की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब भी अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठी, राजस्थान पत्रिका अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा। कुलिश जी की पत्रकारिता आने वाली पीढ़ियों लिए मार्गदर्शन का काम करती रहेगी। नए पत्रकारों के लिए उनकी सबसे बड़ी सीख यही हो सकती है कि कलम को कभी झुकना नहीं चाहिए।