23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आपकी बात: सेकंड होम कल्चर के बढ़ते चलन को लेकर आपके क्या विचार है?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत है पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

4 min read
Google source verification

जयपुर

image

Opinion Desk

Jan 20, 2026

सुकून भरा जीवन मिलता है
महानगरीय भीड़भाड़, प्रदूषण और शोर से बचने के लिए प्रकृति के नजदीक जाने का यह अच्छा तरीका है। किसी हिल स्टेशन जैसी रमणीक जगह फॉर्महाउस बनाने तथा सुकून भरी जिंदगी जीने की इच्छा के साथ लोग इस तरह का निवेश कर रहे हैं जिससे सेकंड होम कल्चर का चलन बढ़ रहा है। - शिवजी लाल मीना, जयपुर

स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलता है
सेकंड होम कल्चर आधुनिक जीवनशैली का परिणाम है, जहां लोग शहरी तनाव से दूर शांति और प्रकृति के निकट समय बिताना चाहते हैं। यह पर्यटन, स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है। हालांकि, अनियंत्रित निर्माण से पर्यावरण, जल संसाधन और स्थानीय संस्कृति पर दबाव भी पड़ता है। संतुलित योजना, सख्त नियम और जिम्मेदार विकास से सेकंड होम कल्चर लाभकारी सिद्ध हो सकता है। - डॉ. अभिनव शर्मा, झालावाड़

समानता के लिए उपयुक्त नहीं
सेकंड होम कल्चर के बढ़ते चलन से जमीन की दरों में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है। इस चलन से अमीर और गरीब के बीच का अंतर बढ़ता ही जा रहा है, जो देश के विकास में बाधक है। गरीब व्यक्ति के लिए तो रहने के लिए फर्स्ट होम ही नही है, लेकिन दूसरी तरफ विकेंड बिताने और वितीय वृद्धि के लिए सेकंड होम है। यह समानता जैसे आदर्शवादी विचारों पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। - अनुराग गिरि, हनुमानगढ़

केवल निजी सुविधा न मानें
सेकंड होम कल्चर आधुनिक जीवनशैली की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, जो तेज शहरीकरण, कार्यदबाव और प्रकृति से बढ़ती दूरी के कारण उभर रहा है। यदि इसका विकास सुनियोजित, पर्यावरण-अनुकूल और सामाजिक संतुलन के साथ किया जाए, तो यह मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और कार्य-जीवन संतुलन को बेहतर बना सकता है। साथ ही यह ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार, अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित कर सकता है। किंतु अनियंत्रित विस्तार से जल संकट, पर्यावरण क्षरण, भूमि मूल्यों में असंतुलन और स्थानीय संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सेकंड होम की अवधारणा को केवल निजी सुविधा या निवेश के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ अपनाना आवश्यक है। - सत्तार खान, नागौर

शांति की अनुभूति होती है
विकास और आधुनिकीकरण की भाग दौड़ में लोगों के जीवन से शांति और सुकून जैसे लुप्त होता जा रहा है। बड़ा घर, बड़ी गाड़ी, अपार धन संपदा होने के बावजूद भी लोगों को शांति की अनुभूति के लिए प्रकृति के निकट जाना पड़ता है। सुकून की तलाश के लिए सेकंड होम जैसे संरचनात्मक बदलाव जिसमें स्वास्थ्य व एकांत की प्रबल संभावना होती है। इसलिए वर्तमान में इस नई और सकारात्मक विचारधारा का प्रचलन बढ़ रहा है जो निसंदेह एक अच्छा परिवर्तन है। - स्वप्निल पांडेय, छिंदवाड़ा

ग्रामीण रोजगार को बढ़ाता है
सेकंड होम कल्चर का बढ़ता चलन आधुनिक जीवनशैली की थकान से उपजा है। शहरों की भागदौड़, प्रदूषण और तनाव से दूर लोग शांति, प्रकृति और निजी समय की तलाश में दूसरे घर की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देता है, लेकिन अनियंत्रित विकास से पर्यावरण व स्थानीय संसाधनों पर दबाव भी बढ़ता है। संतुलित नियोजन और जिम्मेदार उपयोग से ही यह प्रवृत्ति सकारात्मक सिद्ध हो सकती है। - संजय माकोड़े, बैतूल

अच्छी सेहत को मिल रहा बढावा
बड़े शहरों के बाहरी इलाकों में सेकेंड होम अब केवल वीकेंड बिताने की जगह नहीं रहे बल्कि शुद्ध भोजन, प्राकृतिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारी का ठोस मॉडल बनते जा रहे हैं। यहां पूरा परिवार मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटमों से दूर प्राकृतिक परिवेश में अपना समय बिताता है। यहां मनपसंद सब्जियां उगाई जा रही हैं। गाय-भैंस पाली जा रही हैं और इनकी देखभाल करने के लिए एक परिवार को स्थायी रूप से रोजगार भी दे रहे हैं। अधिकांश फॉर्म हाउसों पर एक स्थानीय परिवार को देखभाल, खेती और पशुपालन के लिए रखा गया है। इससे आसपास के गांवों में स्थायी रोजगार सृजित हो रहा है। कई जगहों पर रहने की सुविधा, बिजली-पानी और बच्चों की पढ़ाई तक की व्यवस्था की गई है।- डॉ. प्रेमराज मीना, करौली

बेहतर जीवन का रास्ता बन रहा
सेकंड होम कल्चर का चलन इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि लोग इसे शॉर्ट टर्म रेंटल निवेश समझकर अर्निंग करने लगे हैं। लोग नजदीकी हिल स्टेशन समुद्र तट के लुत्फ को ध्यान में रखकर यह इन्वेस्ट कर रहे हैं इससे लोगों के बेहतर जीवन एवं स्मार्ट निवेश का रास्ता खुल रहा है। इसके साथ ही सेकंड होम कल्चर से टैक्स का लाभ ले रहे हैं एवं निवेश के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। हाईवे, एक्सप्रेसवे, रेलवे सुविधा एवं एयरपोर्ट की सुविधा को देखते हुए सेकंड होम कल्चर तेजी से बढ़ता जा रहा है। - सतीश उपाध्याय, मनेद्रगढ़

निवेश और संसाधनों का संतुलन जरूरी
सेकंड होम कल्चर सुविधा और निवेश का नया माध्यम बन रहा है, लेकिन इसके सामाजिक और पर्यावरणीय असर पर भी विचार जरूरी है। शहरों से दूर दूसरा घर बनाने से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है, वहीं जमीन, पानी और संसाधनों पर दबाव भी बढ़ता है। कई जगह स्थानीय लोगों के लिए जमीन महंगी हो रही है। संतुलन जरूरी है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों की अनदेखी न हो। - राकेश खुडिया, श्रीगंगानगर

सुकून की खोज मुख्य कारण
आधुनिक जीवनशैली में सेकंड होम का बढ़ता चलन शहरी तनाव से मुक्ति और मानसिक शांति की खोज का परिणाम है। लोग निवेश और रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए महानगरों की भीड़ से दूर प्राकृतिक स्थलों को चुन रहे हैं। जहां यह आर्थिक सुरक्षा और सुकून देता है वहीं स्थानीय संसाधनों और भूमि उपयोग पर दबाव भी बढ़ाता है। यह प्रवृत्ति बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है, जिसमें अब 'शांति' और 'सुरक्षा' विलासिता नहीं बल्कि जरूरत बन गई है। - अमृतलाल मारू, इंदौर