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आपकी बात: बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए क्या प्रयास किए जाने चाहिए?

पाठकों ने इस विषय पर विविध प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...

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Mar 31, 2026

सकारात्मक दृष्टिकोण और संवाद की भूमिका

अनुशासन सिखाना एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें प्रेम, समझ और धैर्य आवश्यक हैं। बच्चों की गलती पर डांटने या दंड देने के बजाय उनकी बात ध्यान से सुनना अधिक प्रभावी होता है। अच्छे व्यवहार, जैसे बड़ों का सम्मान या जरूरतमंदों की मदद, पर उनकी सराहना करनी चाहिए। छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देने से उनमें आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। नियम थोपने के बजाय उन्हें समझाकर सिखाना चाहिए। बच्चे माता-पिता से ही सीखते हैं, इसलिए अभिभावकों को स्वयं आदर्श बनना चाहिए। - मीना सनाढ्य, उदयपुर

घर-स्कूल: अनुशासन की पहली पाठशाला

घर और स्कूल बच्चों को अनुशासन सिखाने के प्रमुख केंद्र हैं। इसके लिए आवश्यक है कि माता-पिता स्वयं आदर्श प्रस्तुत करें। समयबद्ध दिनचर्या, दंड के स्थान पर संवाद और प्रेमपूर्ण समझाइश बच्चों के विकास में सहायक होती है। नियमित अभ्यास, धैर्य और निरंतर मार्गदर्शन से अनुशासन स्वाभाविक रूप से विकसित होता है। बच्चों की उम्र के अनुसार जिम्मेदारियां देना और अच्छे व्यवहार पर प्रोत्साहन देना भी जरूरी है। - अमृतलाल मारू, इंदौर

अनुशासन का महत्व समझाना जरूरी

बच्चों में अनुशासन विकसित करने के लिए अभिभावकों को पहले स्वयं अनुशासित होना चाहिए, क्योंकि बच्चे देखकर सीखते हैं। उन्हें अनुशासन का अर्थ और महत्व सरल भाषा में समझाना जरूरी है। समय पर सोना-जागना, कार्यों को निर्धारित समय पर पूरा करना और बड़ों का सम्मान करना जैसी आदतें बचपन से ही डालनी चाहिए। ये प्रयास बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। - वसंत बापट, भोपाल

विद्यालयों में अनुशासनात्मक गतिविधियों का महत्व

नियम और अनुशासन जीवन को सशक्त बनाते हैं। बच्चों के संस्कार और अनुशासन निर्माण में माता-पिता की भूमिका प्रमुख होती है, लेकिन विद्यालय भी इसमें अहम योगदान देते हैं। विद्यालयों में एनसीसी और एनएसएस जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व और निःस्वार्थ सेवा के गुण विकसित किए जा सकते हैं। यह उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करता है। - डॉ. राजेन्द्र कुमावत, जयपुर

बचपन में संस्कारों की नींव

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए बचपन से ही उन्हें व्यवहारिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा देना जरूरी है। बालमन कोमल होता है और वह घर के माहौल से गहराई से प्रभावित होता है। माता-पिता का आचरण ही बच्चों के व्यवहार की दिशा तय करता है। जैसा वातावरण और संस्कार बचपन में दिए जाते हैं, वही आगे चलकर उनके व्यक्तित्व का आधार बनते हैं। - हरिप्रसाद चौरसिया, देवास

अभिभावकों का आचरण ही सबसे बड़ा पाठ

बच्चों को अनुशासन सिखाने का पहला कदम है कि अभिभावक स्वयं अनुशासित रहें। बच्चे उपदेशों से अधिक व्यवहार से सीखते हैं। इसलिए, माता-पिता को अपनी दिनचर्या संतुलित रखनी चाहिए, समय पर उठना, सोना और भोजन करना। मोबाइल और टीवी का सीमित उपयोग भी जरूरी है। जिस प्रकार की दिनचर्या वे बच्चों से अपेक्षित करते हैं, उसे पहले खुद अपनाना चाहिए। - सुशीला शील, जयपुर

दिनचर्या और संस्कारों से अनुशासन

बच्चों में अनुशासन लाने के लिए नियमित दिनचर्या और संस्कारों का पालन आवश्यक है। सुबह जल्दी उठना, बड़ों का सम्मान करना, पढ़ाई और खेल में संतुलन बनाए रखना जैसी आदतें उन्हें जिम्मेदार बनाती हैं। परिवार और समाज में सौहार्दपूर्ण व्यवहार, अतिथियों का सम्मान और सीमित संसाधनों में जीवनयापन की समझ भी सिखानी चाहिए। साथ ही, मोबाइल और टीवी के उपयोग को नियंत्रित रखना जरूरी है। - मुकेश सोनी, जयपुर

संवाद और संगति का प्रभाव

बच्चों के लिए परिवार पहली पाठशाला होता है, जहां वे व्यवहार और संस्कार सीखते हैं। माता-पिता और शिक्षकों को आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए ताकि बच्चे उनका अनुसरण करें। जब बच्चे अनुशासन से भटकें, तो उन्हें प्रेमपूर्वक समझाना चाहिए। उनकी संगति पर ध्यान देना भी जरूरी है, क्योंकि गलत संगत का प्रभाव गहरा होता है। अच्छे कार्यों पर प्रशंसा और नियमित संवाद बच्चों को सही दिशा में बनाए रखते हैं। - आजाद पूरण सिंह राजावत, जयपुर

Published on:
31 Mar 2026 03:00 pm
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