पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं
जल निकासी व्यवस्था की देखरेख जरूरी
मानसून से पहले हमारी जल निकासी व्यवस्था को जाम से मुक्त करने की जरूरत है। जो क्षेत्र निचले स्तर पर हैं और जलभराव की दृष्टि से संवेदनशील हैं, उन्हें खाली कराया जाना चाहिए ताकि जान-माल को कोई नुकसान न हो। करंट से मौत की घटनाओं को रोकने के लिए बिजली विभाग को बरसात से पहले तार केबल को इंसुलेटेड करने की दिशा में पहल चलानी चाहिए। व्यक्तिगत स्तर पर, नागरिकों को एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि वे जल निकासी अवरुद्ध होने का प्रमुख कारण हैं। शहरी और ग्रामीण नियोजन में पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के प्रावधान शामिल होने चाहिए।
—कृष्ण कमल व्यास, चित्तौड़गढ़
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जरूरी है सावधानी
बरसात के मौसम में सावधानी बरतकर हादसों से बचा जा सकता है। बिजली के उपकरणों के उपयोग में सतर्क रहें। बाहर होने पर बिजली कड़कने पर पेड़ के नीचे खड़े न हों। तालाब और नदी के पास न जाएं। बारिश में वाहन का उपयोग सावधानी पूर्वक करें। बारिश से बचने के लिए छाता या बरसाती का उपयोग करें।
—दिलीप शर्मा, भोपाल, मध्यप्रदेश
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लापरवाही न बरतें
हर साल बारिश के मौसम में हादसों की वजह से कई लोगों की मृत्यु हो जाती है। लाइट के खम्भों और पेड़ों से दूरी बनाए रखें। सरकार की गाइडलाइन की पालना करें। सरकार को बारिश में आमजन की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त टीम की व्यवस्था करनी चाहिए। पुल पर यदि पानी बह रहा हो तो उसे पार करने से बचें।
—पवन बैरवा,भीलवाड़ा ,राजस्थान
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वाहन को ठीक रखें
बारिश से पहले अपने वाहन की सर्विस जरूर करवा लें। जिन वाहनों के टायर में ग्रिप खत्म हो जाती हैं वे सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं। ऐसे टायर हादसे का कारण बनते हैंं। वाहन के इलेक्ट्रिक पार्ट्स की भी करें जांच। तेज गति से वाहन न चलाएं, क्योंकि अचानक ब्रेक लगाने से बाइक या स्कूटर फिसल जाता है। टू-व्हीलर चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनें।
—रोहित सोलंकी, नर्मदापुरम
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ड्रेनेज सिस्टम ठीक किया जाए
मानसून से पूर्व ही नगर निकाय द्वारा नालों ओर ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करना चाहिए जिससे जलभराव की समस्या न हो। बिजली विभाग को बिजली के तारों को व्यवस्थित रखना चाहिए, जिससे बारिश में खुले तार से जनहानि नहीं हो। नदी, झरनों, तालाबों के पानी के स्तर की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। पर्यटन स्थलों पर किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बचाव टीमों का गठन करना चाहिए।
—तरुण रंगा नोखा बीकानेर
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जल निकासी की व्यवस्था की जाए
बरसात आने के बाद अक्सर सड़कों पर पानी जमा होकर तालाब का रूप ले लेता हैं और उसमें से वाहन निकालते समय वाहन बीच में ही बंद होने पर हादसे हो जाते है। ऐसे स्थानों पर पानी निकासी की व्यवस्था की जाए।
—अजीतसिंह सिसोदिया, खारा, बीकानेर
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सुरक्षा का रखें ध्यान
बारिश के दौरान जिन स्थानों पर बरसात का जल जमा होने लगता है, वहां से सावधानी से गुजरना चाहिए। झरनों एवं नदियों के पास जाने से बचना चाहिए। हर जगह सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
—सुभाष केपी श्रीवास्तव, इंदौर, मप्र
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सेल्फी लेने से बचें
आजकल लोग मोबाइल से सेल्फी लेने के चक्कर में बहती नदियों में और झरने के नीचे खड़े होने में नहीं झिझक रहे हैं। इससे हादसे हो रहे हैं। इस तरह सेल्फी लेने से बचें।
—छाया कानूनगो, देवास, म.प्र.
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जल निकासी पर दिया जाए ध्यान
सड़कों और गलियों में जल निकासी की उचित व्यवस्था के साथ ही नियमित रूप से नालों की सफाई होनी चाहिए, ताकि सड़कों पर पानी जमा न हो। इसके अलावा नदियों, तालाबों, झीलों आदि की स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई को भी रोका जाना चाहिए ताकि जल का प्राकृतिक बहाव बना रहे।
— देवेंद्र कुमार, बीकानेर