ओपिनियन

इस पतन से धूमिल कामयाबी

मानव स्वभाव अच्छाई को दरकिनार कर बुराई पर ध्यान ज्यादा केन्द्रित करता है। अधिकारों का बेजा इस्तेमाल कर्तव्यनिष्ठ महिलाओं की कामयाबी को भी धुंधला कर देता है।

2 min read
Jun 08, 2018
indian women

- नजमा खातून, शिक्षक

इन दिनों समाचर पत्रों व अन्य संचार माध्यमों में चारित्रिक पतन से जुड़े घटनाक्रमों और अपराधों में महिलाओं के लिप्त होने की खबरें देखने को मिल रही हैं। पिछले दिनों पाकिस्तान के लिए जासूसी करने में पूर्व महिला राजनयिक का नाम हो या फिर गेहूं घोटाले में महिला आइएएस अधिकारी का नाम। महिला अधिकारी व कार्मिकों के रिश्वत लेते पकड़े जाने के समाचार भी नजर आते हैं। ऐसी घटनाएं अपनी मेहनत से कामयाबी हासिल करने वाली महिलाओं के लिए नई चुनौती पैदा करने वाली हैं।

ये भी पढ़ें

ये हैं जिंदगी के फलसफे

दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि एक ओर महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए सरकारी व सामाजिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर कुछ महिलाएं भ्रष्ट आचरण अपनाने लगी हैं। क्या यही प्रतिफल है कानून व समाज द्वारा नारी समुदाय को दिए जा रहे समानता व स्वतंत्रता के अधिकार का। बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वाभाविक रूप से प्रेम, करुणा, दया, ममता व सहनशीलता जैसे गुणों को अपने में समेटे स्त्री आखिर क्यों तृष्णाओं की मृग मरीचिका में भटकने लगी है? क्या ऐसे उदाहरण रूढि़वादी सोच से ग्रसित वर्ग के इस तर्क को बढ़ावा नहीं देंगे कि बेटियों को घर के दायरे में ही सीमित रखा जाए? बेटियों को शिक्षा के अवसर समाप्त करने की सोच रखने वालों के लिए क्या यह मौके की तलाश नहीं होगी?

देखा जाए तो गिनी-चुनी महिलाओं के ऐसे कृत्य संपूर्ण स्त्री समाज से जुड़ी उन महिलाओं के वजूद पर अंगुलियां उठाने का मौका देते हैं जो सकारात्मक सोच के साथ अपने प्रशासनिक दायित्व पूरा करती हैं। चिंता इसी बात की है कि नैतिक व अनैतिक आचरण के बीच के अंतर को न समझने की मूर्खता का परिणाम पहले से शोचनीय व संघर्षपूर्ण हालात का सामना कर रही बेटियों की दुश्वारियां कहीं और न बढ़ा दें। अधिकार जीवन की संतुष्टि के लिए है न कि लालसाओं के चलते असंतुष्टि की ओर चले जाना। इसे समझने में नाकाम चाहे कोई स्त्री हो या पुरुष, सबको ऐसे चक्रवात में फंसा देती है जिसके तूफानी थपेड़ों की मार परिवार के बेकसूरों को भी सहनी पड़ती है।

मानव स्वभाव अच्छाई को दरकिनार कर बुराई पर ध्यान ज्यादा केंद्रित करता है। अधिकारों का बेजा इस्तेमाल कर, भ्रष्ट आचरण में लिप्त होने का कलंक, कर्तव्यनिष्ठ महिलाओं की कामयाबी को भी धुंधला कर देता है। संपूर्ण नारी समुदाय के प्रतिनिधित्व की सोच से ही वे आगे बढ़ सकती हैं।

ये भी पढ़ें

शांगरी-ला में मोदी का ‘नेहरू’ क्षण
Published on:
08 Jun 2018 10:02 am
Also Read
View All