पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत हैं पाठकों के कुछ विचार
बनाना होगा नेशनल मेडिकल पोर्टल
फर्जी डॉक्टरों पर लगाम लगाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय, मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को संयुक्त रूप से नेशनल मेडिकल डेटाबेस तथा पोर्टल का निर्माण करना होगा। जनसामान्य को पंजीकृत मेडिकल स्टाफ की जानकारी उपलब्ध करवानी होगी। स्वास्थ्य विभाग को सतत मॉनिटरिंग प्रणाली अपनाकर प्राइवेट अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों की जांच करनी होगी। फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त एवं त्वरित क़ानूनी कार्रवाई करनी होगी ताकि ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके। - सर्वजीत अरोड़ा, जयपुर
प्रौद्योगिकी का उचित उपयोग कर-एक राय
प्रौद्योगिकी का उचित उपयोग एक ऑनलाइन डेटाबेस बनाया जाना चाहिए, जिसमें सभी पंजीकृत डॉक्टरों की जानकारी उपलब्ध हो। कुछ इस तरह की व्यवस्था हो, जिससे आम जनता इस डेटाबेस तक आसानी से पहुंच सके और डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन की प्रामाणिकता की जांच कर सके तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों का उपयोग कर फर्जी डॉक्टरों की पहचान और निगरानी की जा सकती है। इसके साथ ही टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन परामर्श सेवाओं के लिए सख्त दिशानिर्देश और सत्यापन प्रक्रियाएं होनी चाहिए ताकि फर्जी डॉक्टर इन माध्यमों का दुरुपयोग न कर सकें। - डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
जागरूकता अभियान चलाना चाहिए
बिना डिग्री या रजिस्ट्रेशन वाले फर्जी डॉक्टर्स पर अंकुश लगाना है तो उसके लिए केवल नियम कानून बना देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि आम जनता को ऐसे डॉक्टर्स के बारे में सचेत करने के लिए जागरुकता अभियान चलाना होगा और ऐसे डॉक्टर्स का सामाजिक बहिष्कार भी होना चाहिए। - शेख रईसुद्दीन कुरैशी, मगरलोड (छत्तीसगढ़)
मेडिकल काउंसिल को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए
बिना डिग्री या रजिस्ट्रेशन वाले फर्जी डॉक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को सख्त कानून लागू करने चाहिए। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को नियमित जांच और निगरानी करनी चाहिए। मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से फर्जी चिकित्सा के दुष्परिणाम साझा किए जाएं। मेडिकल काउंसिल को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। - संजय माकोड़े बैतूल