
-अपर्णा पीरामल राजे 'केमिकल खिचड़ी: हाउ आइ हैक्ड माय मेंटल हेल्थ' पुस्तक की लेखिका
भारत में इन दिनों साहित्यिक उत्सवों और पुस्तक विमोचनों का मौसम है। मेरे लिए यह अत्यधिक आनंद की बात है कि पहली बार पुस्तक लिखने वाले कई मित्र उत्साह से पूछते हैं कि अपनी किताब को पाठकों तक कैसे पहुंचाएं। इसी अनुभव ने मुझे बुक मार्केटिंग पर एक व्यावहारिक 'प्लेबुक' तैयार करने के लिए प्रेरित किया, ताकि इसे सरल और समझने योग्य बनाया जा सके। मैं अब तक दो पुस्तकें लिख चुकी हूं। 'केमिकल खिचड़ी: हाउ आइ हैक्ड माय मेंटल हेल्थ' (2022) और 'वर्किंग आउट ऑफ द बॉक्स : 40 स्टोरीज ऑफ लीडिंग सीईओज'(2015)। एक पुस्तक राष्ट्रीय स्तर पर बेस्टसेलर बनी। जबकि दूसरी आलोचकों द्वारा सराही गई, पर व्यापक लोकप्रियता नहीं पा सकी। हालांकि दोनों की विषयवस्तु अलग थी, लेकिन यह भी सच है कि दूसरी पुस्तक तक आते-आते मुझे पुस्तक विपणन की बेहतर समझ हो चुकी थी।
पिछले तीन वर्षों में मैंने पुस्तक प्रचार का एक ऐसा संतुलित मॉडल विकसित किया है, जिसमें डिजिटल पहुंच, पाठकों की प्रतिक्रियाएं, प्रत्यक्ष संवाद, पुस्तक-विक्रय स्थलों पर उपस्थिति और समुदाय का सहयोग- सभी शामिल हैं। सुविधा के लिए इन प्रयासों को दो स्तरों में बांटा जा सकता है। पहला, वे सरल और त्वरित उपाय, जिन्हें कोई भी लेखक बिना अधिक संसाधन के अपना सकता है। दूसरा, वे बड़े और महत्वाकांक्षी कदम, जिनके लिए अतिरिक्त निवेश, संपर्क या प्रकाशक का सहयोग आवश्यक होता है, पर उनका प्रभाव भी कहीं अधिक होता है। शुरुआत में इनमें से दो-तीन कदम पर्याप्त होते हैं। ये कम खर्चीले होते हैं और पुस्तक के प्रति शुरुआती रुचि पैदा करने में मदद करते हैं। इनमें पहला कदम है, पहले महीने में ही अमेजन पर मित्रों, परिवार और शुरुआती पाठकों से पुस्तक पर ईमानदार समीक्षाएं लिखवाइए। दूसरा, एक ऐसे सोशल मीडिया मंच पर ध्यान केंद्रित करें, जहां आपकी उपस्थिति सबसे मजबूत हो। मेरे लिए तो लिंक्डइन कारगर रहा, आपके लिए कुछ और हो सकता है। पुस्तक से उद्धरण और पाठकों की प्रतिक्रियाएं साझा करें। अपने नेटवर्क का संतुलित उपयोग करें। महत्वपूर्ण सूचनाओं के लिए वॉट्सऐप ब्रॉडकास्ट सूची बनाएं, पर अति से बचें। बड़े राष्ट्रीय मंचों की बजाय स्थानीय अखबारों और शहर की पत्रिकाओं से शुरुआत करें। अपने विषय से जुड़े मीडिया में जगह मिलना अपेक्षाकृत आसान होता है। पुस्तक क्लब, स्कूल या सामाजिक संस्थाओं में बातचीत भी महत्वपूर्ण है। यहां उद्देश्य केवल पुस्तक बेचना नहीं, पाठकों से संवाद स्थापित करना होना चाहिए।
अब अधिक महत्वाकांक्षी विपणन योजनाओं पर आते हैं। ये वे कदम हैं जो पुस्तक की पहुंच को कई गुना बढ़ा सकते हैं। आमतौर पर इनके लिए अधिक संसाधन या प्रकाशक का सहयोग आवश्यक होता है। इन योजनाओं में राष्ट्रीय अखबारों और उनके साप्ताहिक विशेषांकों तक पहुंच बनाएं। मेरे लिए ये अनुभव अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुए। टेडएक्स टॉक अवश्य दें। इससे आपकी बात संक्षिप्त, प्रभावशाली और साझा करने योग्य रूप में सामने आती है और आपकी पुस्तक एक सशक्त ब्रांड से जुड़ती है। एक अच्छी उपस्थिति वाला पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित करें। उसके महत्वपूर्ण अंशों को रिकॉर्ड करवाएं। अपनी यात्रा के दौरान प्रकाशक से पुस्तक हस्ताक्षर कार्यक्रम तय करने को कहें। हवाई अड्डों के बुकस्टोर विशेष रूप से उपयोगी होते हैं। प्रकाशक के माध्यम से ऐसे मंचों तक पहुंचें, जहां पुस्तक-प्रेमी पाठक हों। आमंत्रण मिलने पर भाग लेना अधिक सहज होता है। अपने क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों का सहयोग उपयोगी होता है। मैंने प्रचार के लिए भुगतान नहीं किया, पर मेरे कई मित्रों और सहकर्मियों ने उत्साहपूर्वक मेरी पुस्तक का समर्थन किया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप तीन वर्षों में मेरी पुस्तक एक साहित्यिक पुरस्कार की सूची में पहुंची, 15 हजार से अधिक प्रतियां बिकीं। विभिन्न प्रिंट, डिजिटल और पॉडकास्ट मंचों पर सौ से अधिक उल्लेख हुए और सौ से अधिक संवाद व व्याख्यान आयोजित हुए। सबसे संतोषजनक उपलब्धि रही पाठकों से बना गहरा रिश्ता। कई लोगों ने एक साथ 10 से लेकर 100 प्रतियां तक खरीदीं, क्योंकि विषय ने उन्हें भीतर तक छुआ। यह यात्रा निश्चित ही थकाने वाली थी, पर मेरे लिए यह केवल पुस्तक प्रचार नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के पक्ष में एक सतत संवाद था।
सब कुछ एक साथ करना आवश्यक नहीं। इन गतिविधियों को हफ्तों और महीनों में किया जा सकता है। किसी पुस्तक की सफलता दौड़ नहीं, एक लंबी मैराथन होती है। अंतत: यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपनी किताब के संदेश को दुनिया तक किस तरह पहुंचाते हैं। पहली बार लेखक बनने की प्रक्रिया में लेखन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है उसका प्रचार, क्योंकि आज की भीड़भाड़ भरी दुनिया में सही विपणन ही आपकी आवाज को पाठकों तक पहुंचा सकता है। (मुंबई मिरर में प्रकाशित लेख, विशेष अनुमति से पत्रिका पाठकों के लिए)
Published on:
15 Jan 2026 03:31 pm
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