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सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से
सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लैंगिक असमानता दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें हैं— ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं’, ‘वन स्टॉप सेंटर योजना’, ‘महिला हेल्पलाइन योजना’ और ‘महिला शक्ति केंद्र’ प्रमुख हैं। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से लैंगिेक समानता व लड़कियों के शैक्षिक नामांकन में प्रगति देखी जा रही है।
—श्याम सुंदर खंडेलवाल, गांव-कुकनवाली, कुचामन सिटी, राजस्थान
महिलाओं को शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करें
महिलाओं को गुणवत्ता शिक्षा मिले। इसमें विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग, गणित जैसे उच्च वेतन वाले क्षेत्रों में लड़कियों को प्रोत्साहन मिले। इससे वह तकनीकी व व्यावसायिक कौशल में पारंगत हो सके। समान कार्य के लिए समान वेतन मिले।
अगर कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ पद या उनके लिंग को लेकर भेदभाव हो तो उन्हें कठोर सजा मिलनी चाहिए। यदि महिलाओं को समाज में सम्मान मिलेगा और सही प्रशिक्षण और शिक्षा मिलेगी तो आर्थिक क्षेत्र में लैंगिक असमानता अपने आप ही दूर हो जाएगी। सरकार को इस दिशा में प्रयास करने चाहिए।
— मीना सनाढ्य, उदयपुर राजस्थान
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केवल योग्यता को माना जाए आधार
कार्य भार सौंपते समय लिंग को नजरंदाज करते हुए सिर्फ योग्यता को प्राथमिकता देनी चाहिए। ज़रूरी है कि पद और भूमिका निश्चित करते समय ईर्ष्या और असुरक्षा का भाव नहीं आना चाहिए, क्योंकि काफी पदों और कार्य का वितरण केवल लिंग के आधार पर किया जाता है। इसी वजह से आर्थिक क्षेत्र में रचनात्मकता और लचीलापन विलुप्त हो गये है ।
— हितेश सुथार, जोधपुर
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लड़कियों को आर्थिक क्षेत्र में सशक्त बनाएं
सांस्कृतिक एवं सामाजिक मानदंडों में परिवर्तन करके लड़कियों को आर्थिक क्षेत्र में सशक्त बनाना आवश्यक है। लिंग आधारित भेदभाव को कठोर कानूनी प्रावधान द्वारा खत्म किया जा सकता है। छोटे बच्चों के शैक्षिक पाठ्यक्रम में भी लैंगिक असमानता एक अभिशाप जैसे बिंदु शामिल हो। बेटी पढ़ाओ देश बढ़ाओ जैसी अभिनव योजनाओं के साथ ही सरकार को अपने जेंडर बजट मे भी आर्थिक क्षेत्र के लिए महिला केंद्रित योजनाओं को और अधिक बढ़ावा देना चाहिए।
— हिना संदीप स्वर्णकार , जहाजपुर, शाहपुरा राजस्थान
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शिक्षा और कौशल विकास में समानता सुनिश्चित हो
आर्थिक क्षेत्र में लैंगिक असमानता दूर करने के लिए शिक्षा और कौशल विकास में समानता सुनिश्चित करनी चाहिए। महिलाओं को नेतृत्व और प्रबंधन भूमिकाओं में अवसर दिए जाएं। नीतियों में लैंगिक दृष्टिकोण शामिल किया जाए। कार्यस्थलों में सुरक्षित और समर्थनकारी वातावरण तैयार किया जाए। महिलाओं के उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। सामाजिक मान्यताओं और रूढ़ियों को बदलने के प्रयास किए जाएं।
— संजय माकोड़े बैतूल
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संवेदनशीलता की आवश्यकता
आर्थिक क्षेत्र में लैंगिक समानता के लिए संवेदनशीलता की आवश्यकता है। कानूनों के बावजूद भी आज बड़े पैमाने पर समान काम की समान कीमत नहीं है। इससे महिलाओं में हीन भावना आती है और एकल परिवार वाली महिलाओं के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी संभव नहीं होता है। निजी क्षेत्र में काम देने वाले संगठनों को इस दिशा में संवेदनशील होना होगा। तभी महिलाएं आत्मविश्वास के साथ काम कर अर्थव्यवस्था में अपना बेहतर सहगोग कर सकेगी।
— चंद्रभान बिश्नोई, जोधपुर
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महिलाओं को समान अवसर मिलें
इसके लिए महिलाओं को बराबर संवैधानिक अधिकार, अवसर और सुरक्षा के प्रयास होने चाहिए। महिलाओं के सशक्तिकरण उनकी आत्मनिर्भरता के लिए समान अवसर दिए जाएं। महिलाओं के शोषण, भेदभाव पर अंकुश लगे। लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए महिलाओं को राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में भी प्रतिनिधित्व करने का समान अवसर मिले।
— सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ एमसीबी छत्तीसगढ़
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घर व कार्यस्थल पर महिलाओं को सकारात्मक सहयोग मिले
आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तभी बढ़ सकती है, जब वे परिवार की आय बढ़ाएं। लेकिन कार्यस्थल पर अपना पूरा समय देने के बाद महिलाएं घर की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो पातीं। इसलिए दोनों में समन्वय नहीं हो पाता। इसके लिए कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति लचीला रुख अपनाना चाहिए। घर की जिम्मेदारी में भी परिवार के अन्य सदस्यों को सकारात्मक सहयोग मिलना चाहिए।
— सुनीता उदयवाल, कोटा राजस्थान