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आपकी बातः सरकारी की तरह निजी क्षेत्र में भी चाइल्ड केयर लीव को लेकर आपके क्या विचार हैं?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं। पेश हैं पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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Feb 02, 2026

चाइल्ड केयर लीव बेहद जरूरी
चाइल्ड केयर लीव सभी कर्मचारियों के लिए आवश्यक है । निजी क्षेत्रों में अगर कामकाजी महिला कर्मचारियों को सुविधा पूर्णरूप से नहीं मिल पाती है तो उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कर्मचारियों दी जाने वाली यह सुविधा अन्य सभी सुविधाओं से एक सर्वोत्तम निवेशों में से एक है , इससे समग्र विकास, लैंगिक समानता और सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा मिलता है। इससे बच्चों के विकास की रक्षा के लिए सुरक्षित और समृद्ध समाज के निर्माण के लिए बहुत जरूरी है। नवजात शिशु की भावनात्मक जरूरतों और विकास को ध्यान में रखते हुए निजी क्षेत्रों में भी सरकारी नियम की तरह एक समान सुविधाएं देने की बहुत जरूरत है। - मनवीर चन्द कटोच, जयपुर
महिलाकर्मियों व उनके बच्चों के हित में
निजी क्षेत्र में भी अगर चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान किया जाता है तो महिला कर्मियों एवं उनके बच्चे के हित में यह एक प्रगतिशील कदम होगा। महिला कर्मियों को इससे काफी सुविधा मिल सकती है। इस लीव को ऐच्छिक भी किया जा सकता है। निजी क्षेत्र में चाइल्ड केयर लीव को हाफ पे लीव के रूप में भी स्वीकृत किया जा सकता है। - ललित महालकरी, इंदौर
मानवीय दृष्टिकोण एक-सा होना चाहिए
मेरे विचार से सरकारी क्षेत्र की तरह निजी क्षेत्र में भी चाइल्ड केयर लीव लागू होनी ही चाहिए और उसके पीछे ठोस कारण है पहला, बच्चे की देखभाल कोई पर्सनल लग्जरी नहीं, बल्कि सामाजिक ज़िम्मेदारी है। कर्मचारी अगर मानसिक रूप से निश्चिंत होगा तो उसका कार्य-क्षमता स्तर भी बढ़ेगा। दूसरा, आज निजी क्षेत्र में काम का दबाव अधिक है। खासकर कामकाजी माता-पिता, विशेषकर माताएं सीसीएल के अभाव में करियर और परिवार में से किसी एक को चुनने को मजबूर हो जाती हैं। इससे प्रतिभा का नुकसान होता है। तीसरा, समान कार्य–समान अधिकार के सिद्धांत पर सरकारी और निजी क्षेत्र में यह सुविधा समान होनी चाहिए। नीतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण एक-सा होना चाहिए। निजी कंपनियां अगर सीसीएल अपनाती हैं तो कर्मचारी संतुष्टि, संस्थान की छवि और दीर्घकालिक उत्पादकता तीनों में लाभ होगा। - मनीष दीक्षित, बांसवाड़ा
चाइल्ड केयर लीव देना उचित नहीं
सरकारी तथा निजी क्षेत्र की कार्य संस्कृति में जमीन - आसमान का अंतर होता है । सरकारी क्षेत्र में आठ घंटे के लिए कार्यालयों में उपस्थित रहना पड़ता है, जबकि निजी क्षेत्र के कार्यालयों में कम से कम दस से बारह घंटे । इसी तरह सरकारी क्षेत्र के कार्यालयों में कर्मचारियों पर ना तो काम खत्म करने का दबाव होता है और ना ही जवाबदेही तय की जाती है । सरकारी की तुलना में निजी क्षेत्र में छुट्टियां भी कम मिलती है । निजी क्षेत्र में कर्मचारियों को उन्हें दिए गए टास्क को पूरा करना पड़ता है और पूरा नहीं करने वालों के सिर पर बर्खास्तगी की तलवार भी लटकी रहती है । इसलिए मेरे विचार से निजी क्षेत्र में चाइल्ड केयर लीव नहीं देना ही उचित होगा । - वसंत बापट, भोपाल
निजी कंपनियां भी संवेदनशीलता दर्शाएं
निजी क्षेत्र में चाइल्ड केयर लीव के लिए कोई एक समान केंद्रीय कानून नहीं है, जैसा कि सरकारी और राज्य के लेबर कानूनों पर निर्भर करता है। निजी क्षेत्र की महिला कर्मचारियों को 26 सप्ताह का वैधानिक सवैतनिक मातृत्व अवकाश मिलता है। महिला और मातृत्व दोनों अभिन्न हैं अतः निजी क्षेत्रों में भी 52 सप्ताह का सवैतनिक मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। बहुत सी कंपनियां महिला कर्मचारियों को घर से काम या लचीले काम के घंटे की सुविधा का विकल्प उपलब्ध कराती हैं किंतु सरकारी नियमों का अनुसरण महिला वर्ग के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है। - डॉ. मुकेश भटनागर, भिलाई

Published on:
02 Feb 2026 05:53 pm
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