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बचत की करने की प्रवृति बढ़ाएं
ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने में महिला साख समूह काफी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रयास इस संबंध में उपयोगी साबित हो रहे हैं। देश के कुछ हिस्सों के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सेवी संस्थाएं भी महिलाओं को वित्तीय रूप से जागरूक कर रही हैं। साख समूहों से महिलाओं में बचत करने की प्रवृत्ति, आपसी लेन देन एवं वित्तीय अनुशासन का विकास हो रहा है। - ललित महालकरी, इंदौर
वित्तीय अवधारणाएं समझाएं
ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए आसान भाषा व स्थानीय तरीकों का उपयोग करके वित्तीय अवधारणाओं को समझाना चाहिए। महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय प्रशिक्षण देना, सरल बचत और निवेश उत्पादों को बढ़ावा देना, बैंक सखी जैसी पहलों का विस्तार करना और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना जैसे प्रयास किए जा सकते हैं। बचत को बढ़ावा देना व स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना, जागरूकता और सरकारी योजनाओं का लाभ देने का संकल्प ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने में लाभकारी बन सकेंगे। - शिवजी लाल मीना, जयपुर
जागरूकता अभियान चलाएं
ग्रामीण महिलाओं में हमेशा से वित्तीय साक्षरता की कमी अक्सर देखने को मिलती हैं ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय साक्षरता देने के लिए जिला पंचायतों को प्रत्येक जनपद स्तर पर वित्तीय जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। इसमें सार्वजनिक और निजी बैंकों को भी भाग लेना चाहिए और वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित करना चाहिए। ग्रामीण अंचलों में आंगनवाड़ी के माध्यम से भी वित्तीय जागरूकता फैलाई जा सकती हैं। ग्राम स्तर पर स्वयं सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। स्मॉल फाइनेंस बैंको को दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक विस्तारित करना आवश्यक है चूंकि भारत में ग्रामीण महिलाएं वित्तीय रूप से सशक्त होगी तो प्रदेश व देश भी सशक्त होगा। - मुकेश नायक, उज्जैन
महिलाओं को डिजिटल साक्षरता दें
वित्तीय साक्षरता महिला सशक्तिकरण की कुंजी है ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता केवल जानकारी देने से नहीं बल्कि निरंतर अभ्यास, भरोसे और स्थानीय सहभागिता से बढ़ती है। प्रधानमंत्री डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों के तहत डिजिटल बैंकिंग, ऑनलाइन लेनदेन और साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण देना चाहिए। सरल बजट बनाना सीखाना चाहिए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। छोटे व्यवसाय के लिए बजट बनाना, लागत, लाभ स्थानीय भाषा में समझाना चाहिए। बचत, ऋण, ब्याज, बीमा, डिजिटल भुगतान जैसे विषयों की जानकारी देनी चाहिए। जन धन खाते मोबाइल बैंकिंग की ट्रेनिंग धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी देनी चाहिए। महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होगी तो पूरा परिवार और समाज सशक्त होगा। - मीना सनाढ्य, उदयपुर
नियमित जागरूकता शिविर का आयोजन करें
ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सरल और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। प्रशिक्षण में बचत, बैंक खाता, ऋण, बीमा और सरकारी योजनाओं की जानकारी स्थानीय भाषा में उदाहरणों के साथ समझाई जाए। साथ ही मोबाइल फोन के जरिए यूपीआइ, डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं का अभ्यास कराया जाए। आंगनवाड़ी व पंचायत स्तर पर नियमित जागरूकता शिविर आयोजित हों। इससे महिलाओं की आर्थिक समझ, आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावी रूप से बढ़ेगी। - डॉ. राजीव कुमार, जयपुर
आंगनवाड़ी को सशक्त बनाएं
ग्रामीण महिलाओं के बीच स्वयं सहायता समूह एक सशक्त सामाजिक संगठन है। इन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बैंकिंग, बजट, बचत एवं डिजिटल धोखा धड़ी से बचाव का विधिवत प्रशिक्षण दिया जा सकता है। महिलाओं में वित्तीय साक्षरता के लिए आंगनवाड़ी और पंचायत को सशक्त किया जाना चाहिए। - सतीश उपाध्याय, मनेद्रगढ़, छत्तीसगढ़
सूूक्ष्म उद्यमों के लिए ऋण दें
ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए बजटिंग सिखाना, डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण देना एक प्रभावी कदम होगा। निवेश, बीमा और ऋण जैसे विषयों पर सरल भाषा में जानकारी देना भी जरूरी है। सूक्ष्म-उद्यमों के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराना जैसे प्रयास किए जा सकते हैं, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके। महिलाओं को जीवन में आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन करना चाहिए, जिससे वे सम्मानजनक, सुरक्षित जीवन जी सकें। - प्रवेश भूतड़ा, सूरत
स्थानीय भाषा में वित्तीय साक्षरता दें
ग्रामीण क्षेत्रों में महिला साक्षरता दर काफी कम है, जिसके कारण ग्रामीण महिलाएं वित्तीय नियोजन, स्मार्ट बचत, ऑनलाइन धोखाधड़ी आदि को नहीं समझ पाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए लखपति दीदी, बैंक सखी, वित्तीय साक्षरता शिविरों के माध्यम से वित्तीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। सूक्ष्म वित्त, वित्तीय नियोजन, घरेलू बजट और बचत के महत्त्व को समझाने के लिए स्थानीय भाषाओं में सरल और सचित्र शैक्षिक सामग्री तैयार की जानी चाहिए। सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए, महिला सशक्तिकरण केंद्रों और ग्राम सभाओं में नियमित रूप से वित्तीय साक्षरता सत्र आयोजित कर वित्तीय साक्षरता को बढावा दिया जा सकता है। - डॉ. प्रेमराज मीना, करौली
स्कूल स्तर से वित्तीय शिक्षा प्रदान करें
लड़कियों को स्कूल स्तर से ही मूल वित्तीय शिक्षा देनी चाहिए। परिवार के पुरुष सदस्यों को भी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी के लिए संवेदनशील बनाना चाहिए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा, पंचायत प्रतिनिधि और प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाएं वित्तीय सखी के रूप में सरल व स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण दें। डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के तरीके समझाए जाएं। घर के बजट बनाने, आय-व्यय का लेखा रखने और दीर्घकालीन बचत की आदत विकसित करने और अनावश्यक कर्ज से बचने के लिए जागरूक करना अति आवश्यक है। - डाॅ. मुकेश भटनागर, भिलाई
आंगनवाड़ी केंद्रों को आधार बनाया जाए
ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों को आधार बनाया जाए। आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देकर बचत, बैंकिंग, बीमा और डिजिटल भुगतान की जानकारी महिलाओं तक पहुंचाई जाए। पंचायत स्तर पर साप्ताहिक वित्तीय साक्षरता कैंप अनिवार्य हों। इन कैंपों में सरकारी योजनाओं, पेंशन और ऋण प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया जाए। लिखित सामग्री और उदाहरणों से प्रशिक्षण प्रभावी बने। इससे महिलाएं ठगी से बचेंगी और आत्मविश्वास के साथ आर्थिक निर्णय ले पाएगीं। - राजेन्द्र कुमार जांगिड़, बालोतरा