
Jhandu Kumar miss gold medal: भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games 2026) में भारत के लिए पहला पदक जीता है। इस जीत के बाद उनके कोच राजिंदर सिंह राहेलू ने खुलासा किया कि लक्ष्य स्वर्ण पदक था, लेकिन वह थोड़ी सी गलत गणना और गलतफहमी की वजह से से चूक गए। बता दें कि झंडू कुमार ने अपने दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम वजन उठाकर पुरुषों की हैवीवेट कैटेगरी में कांस्य पदक जीता है। राहेलू ने कहा कि टीम ने गोल्ड के लिए जरूरी लिफ्ट का हिसाब पहले ही लगा लिया था और उन्हें जीतने का पूरा भरोसा था, लेकिन गलतफहमी भारी पड़ गई।
राहेलू ने बताया कि ऐसा नहीं था कि गोल्ड के लिए कॉम्पिटिशन बहुत कड़ा था, लेकिन यह सिर्फ मिसकम्युनिकेशन था। मैं थोड़ा दूर था और कैलकुलेशन में थोड़ी मुश्किल हुई। हम गोल्ड मेडल से सिर्फ दो पॉइंट से चूक गए। उन्होंने बताया कि पैरा पावरलिफ्टिंग में दो पॉइंट का अंतर कैसे कॉम्पिटिशन को बहुत करीबी बना सकता है। उन्होंने बताया कि 2 पॉइंट का मतलब 2-3 किलोग्राम होता है। लेकिन, यह देखते हुए कि इतने करीबी मुकाबलों में शरीर कैसा परफॉर्म करता है, कैलकुलेशन में थोड़ी सी गलती हो गई। लेकिन, कोई बात नहीं, हमारे पास मेडल है और हमने भारत का खाता खोल दिया है, जो सबसे अच्छी बात है।
झंडू कुमार ने 190 किलो की सबसे अच्छी लिफ्ट के साथ पोडियम पर जगह बनाई, जिससे उन्हें 130.9 पॉइंट मिले। उन्होंने पहले प्रयास में 181 किलो उठाकर 124.7 पॉइंट हासिल करके जबरदस्त शुरुआत की थी। फिर दूसरी लिफ्ट में अपना मार्क 190 किलो तक सुधारा, जिससे वह कुछ समय के लिए स्टैंडिंग में टॉप पर पहुंच गए। अपने आखिरी प्रयास में झंडू ने 196 किलो उठाया, जिससे बर्मिंघम 2022 में बनाए गए कॉमनवेल्थ गेम्स मीट रिकॉर्ड टूट जाता। लेकिन, वह लिफ्ट पूरी नहीं कर सके और आखिर में ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा।
बता दें कि इससे पहले भारत के लाइटवेट पैरा पावरलिफ्टर मेडल से चूक गए थे। अशोक पुरुषों के फाइनल में पर्सनल बेस्ट 200 किलो लिफ्ट के साथ चौथे स्थान पर रहे, उन्होंने 143.8 पॉइंट बनाए, जबकि परमजीत कुमार 176 किलो और 135.6 पॉइंट के साथ सातवें पायदान पर रहे।