Patrika Interview: पेरिस ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने वाली स्कीट शूटर माहेश्वरी चौहान ने 'पत्रिका' से खास बातचीत में कहा कि उन्हें भविष्य में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है, लेकिन मुझे हर पल याद आता है कि हमने सिर्फ एक अंक से कांस्य पदक जीतने का मौका गंवा दिया।
सौरभ कुमार गुप्ता. पेरिस ओलंपिक गेम्स 2024 में छह भारतीय खिलाड़ी अपनी-अपनी स्पर्धाओं में चौथे स्थान पर रहकर पदक जीतने से चूक गए थे। इसमें भारतीय स्कीट जोड़ी अनंतजीत सिंह नरूका और माहेश्वरी चौहान भी हैं। ये जोड़ी कांस्य पदक मुकाबले में चीनी जोड़ी से सिर्फ एक अंक से हार गई थी। 'पत्रिका' से खास बातचीत में माहेश्वरी ने कहा कि उन्हें दुख है कि पदक हाथ से फिसल गया, लेकिन ओलंपिक से मिला अनुभव उन्हें भविष्य में और बेहतर निशानेबाज बनाएगा।
माहेश्वरी ने कहा, जब आप पदक के पास आकर चूक जाते हैं तो किसी भी एथलीट के लिए इससे बुरा अनुभव कुछ नहीं होता। इससे यह भी पता चलता है कि खेल में गलती करने की कोई गुंजाइश नहीं होती। मुझे हर पल याद आता है कि हमने सिर्फ एक अंक से कांस्य पदक जीतने का मौका गंवा दिया। उस दिन हम भी अच्छा खेल रहे थे, लेकिन चीनी शूटर हमसे सिर्फ एक अंक बेहतर थे। मैंने यह सबक सीखा है कि ओलंपिक जैसे स्तर पर एक छोटी सी गलती बहुत भारी पड़ती है।
यह मेरा पहला ओलंपिक था और पहली बार कोई भारतीय स्कीट जोड़ी फाइनल तक पहुंची थी। ऐसे में यह हमारे लिए बड़ा पल है और यह चीज मुझे भविष्य में और अच्छा करने के लिए प्रेरित करती रहेगी। यहां मिला अनुभव मेरे लिए बहुत काम आएगा।
सच कहूं तो जब मैंने भारत से पेरिस के लिए उड़ान भरी थी, तब मन में सिर्फ यही था कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। इसके अलावा और कोई उम्मीद मैंने नहीं की थी, क्योंकि इससे आपके ऊपर दबाव पड़ता है। मुझे खुशी है कि हमने दुनिया को दिखाया कि भारतीय शूटर किस स्तर पर प्रदर्शन कर सकते है। पदक नहीं जीत पाने की निराशा है, लेकिन चौथे स्थान पर आना आठवें या दसवें स्थान पर आने से बेहतर है।
ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर हर एथलीट अपनी पूरी तैयारी के साथ आता है, लेकिन पदक तक वही पहुंच पाता है, जो मानसिक तौर पर अपने विपक्षी से मजबूत होता है। मेरा सपना 2028 ओलंपिक गेम्स में भी भाग लेना है और मुझे लगता है कि मैं अब बेहतर तैयारी और मानसिकता के साथ इन खेलों में जाऊंगी।
यदि हम तकनीकी स्तर की बात करें तो चीन और कोरियाई एथलीटों से ज्यादा बेहतर हैं, लेकिन हम सिर्फ एक चीज में मात खा जाते हैं। वे हमसे कही ज्यादा आक्रामक होते हैं और इसका असर उनके प्रदर्शन में दिखता है।