
Rise & Fall Season 2: रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल सीजन 2’ की शुरुआत के साथ ही शो में विवादों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। शो में बतौर कंटेस्टेंट शामिल हुए शहजाद पूनावाला इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं। हाल ही में सिवेत तोमर के साथ हुई झड़प के बाद सिवेत को शो से बाहर कर दिया गया। अब शहजाद ने खुलासा किया है कि उन्होंने खुद मेकर्स से सिवेत को शो से बाहर न करने और उसे माफ करने की अपील की थी।
एक हालिया एपिसोड में शहजाद ने कहा कि उन्हें अक्सर ऐसा लगता है कि हर स्थिति में समझौता उन्हें ही करना पड़ता है। सिवेत के साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि झड़प के बाद जब वह इलाज करा रहे थे, तब उन्होंने शो के मेकर्स से कहा था कि सिवेत को बाहर न भेजा जाए।
शहजाद के मुताबिक, उन्होंने मेकर्स से कहा था, 'उसे बाहर मत भेजो, उसे रखो और माफ कर दो।' उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि सिवेत की उम्र करीब 29-30 साल है और यह शो उसके लिए रोजी-रोटी का जरिया है। शहजाद ने कहा कि यह उनके लिए रोजी-रोटी का सवाल नहीं है। उन्होंने इसी बात को अपनी स्थिति और प्रियंका चाहर चौधरी के साथ हुए विवाद से जोड़ते हुए कहा कि जब वह सिवेत को माफ कर सकते हैं तो प्रियंका से माफी क्यों नहीं मांग सकते।
दरअसल, शो में शहजाद और प्रियंका के बीच भी विवाद देखने को मिला था। शहजाद ने प्रियंका को 'गोल्ड डिगर' कहा था, जिसके बाद दोनों के बीच बहस हुई। बाद में शहजाद ने इरीना रुडाकोवा से शो छोड़ने की इच्छा भी जाहिर की। उन्हें चिंता थी कि उनके खिलाफ कोई आरोप लग सकता है, जिसका इस्तेमाल उनके विरोधी उनकी छवि खराब करने के लिए कर सकते हैं। इरीना ने उन्हें शो छोड़ने के बजाय प्रियंका से माफी मांगकर मामला शांत करने की सलाह दी।
वहीं, सिवेत और शहजाद का विवाद शो के तीसरे एपिसोड में शुरू हुआ था। शहजाद ने सिवेत को ‘अल्टीमेट रूलर’ की रेस से बाहर करने के लिए नामित किया था। इसके बाद दोनों के बीच बहस बढ़ गई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इस दौरान शहजाद का कुर्ता फट गया और सिवेट को बाद में शो से बाहर कर दिया गया।
सिवेत ने बाहर होने के बाद एक वीडियो में अपनी तरफ की बात रखी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने शहजाद को मारा नहीं था और उनका कुर्ता पकड़ने की वजह से फटा था। सिवेत ने यह भी आरोप लगाया कि शहजाद ने उन्हें धर्म और जाति से जुड़ी बातों को लेकर बार-बार उकसाया था। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि हिंसा गलत थी।