
लाहौर।पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के आतंकवाद-रोधी विभाग ने चरमपंथ को लेकर फंड बनाने के आरोप में जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस फंड को पाने के लिए कई गैरसरकारी संस्थाएं तैयारी की गईं हैं। इनका इस्तेमाल कर चरमपंथ के लिए पैसा एकत्र किया जाता है। इस मामले में लश्कर ए तैयबा और फलाहे इंसानियत फाउंडेशन के 13 सदस्यों के खिलाफ पंजाब के अलावा कई शहरों में 23 मुकदमें दर्ज किए गए हैं। साथ ही संगठनों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई।
माना जा रहा है कि हाफिज सईद को गिरफ्तार किया जा सकता है। पंजाब आतंकवाद-रोधी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन संगठनों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। पंजाब के आतंकवाद-रोधी विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि जमात उद दावा, लश्कर-ए-तैयबा और फलाह ए इंसानियत फ़ाउंडेशन में बड़े पैमाने पर जांच शुरू की गई है। इन संगठनों के जरिए इकट्ठा किए गए पैसे का इस्तेमाल चरमपंथी गतिविधियों के लिए किया गया। इन सबके के बीच सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान में चरमपंथ के खिलाफ ये कार्रवाई सिर्फ दिखावा है या ये सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
पाकिस्तानी सुरक्षा मामलों में विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के मामलों से ये पता चलता है कि पूरी दुनिया में स्वीकार्य चरमपंथ की अवधारणा को पाकिस्तान ने पहली बार स्वीकार किया है। इससे पहले, पाकिस्तान चरमपंथी संगठनों को विभिन्न प्रकारों में बांटता था। इसमें पाकिस्तान अपना हित जोड़कर चलता था। इसके साथ भारत विरोधी संगठनों को वह अधिक अहमियत देता था।
पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की हालिया बैठक में पाकिस्तान ने कहा था कि ये संगठन आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं। इससे ज्यादा खतरा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या आईएसआईएस जैसे और खतरनाक समूहों से हैं। हालांकि, वैश्विक समुदाय का मानना था कि इन सभी संगठनों से समान तरह का खतरा है।
यूरोपीय देशों की निगाह पाकिस्तान की कार्रवाई पर टिकी हैं
भारत की कोशिशों के बाद आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद को वैश्विक आतंकी घोषित किया गया है। पाकिस्तान पर दबाव है कि वह हाफिज सईद के साथ नरमी से पेश नहीं आए। ऐसा करने पर उसे वैश्विक प्रतिबंधों की मार झेलनी पड़ सकती है। अमरीका और यूरोपीय देशों की निगाह पाकिस्तान की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर पाकिस्तान इन संगठनों पर सख्ती से पेश नहीं आता है तो उसके लिए मुसीबत और बढ़ जाएगी। भारत से बातचीत की उसकी तमाम कोशिशें नकाम हो चुकी है। भारत का दो टूक जवाब है कि पाक पहले आतंकी संगठनों का का खात्मा करे, इसके बाद ही बातचीत की मेज पर आए।
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