तीन साल से दोनों देश के बीच नहीं हुई है विदेशमंत्री स्तर की बातचीत पिछले साल अक्टूबर में आयोजित बैठक को भारत ने रद्द किया था पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों के बीच बरकरार है तनाव
इस्लामाबाद।पुलवामा हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते काफी नाजुक बने हुए हैं। पुलवामा हमले के बाद भारत ने जिस तरह पाकिस्तान के खिलाफ कदम उठाए, उससे पाकिस्तान दुनिया भर में अलग-थलग पड़ गया है। अब पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है की जल्द ही भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर जमी हुई बर्फ पिघलेगी और भारत-पाक के विदेश मंत्री एक मेज पर बैठकर बात कर सकेंगे। पाकिस्तान को उम्मीद है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की इस महीने के अंत में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की मंत्रिस्तरीय बैठक के मौके पर औपचारिक रूप से मुलाकात हो सकती है।
पिघलेगी जमी हुई बर्फ
पाकिस्तान ने कहा है कि हालाँकि दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना नहीं है। लेकिन दोनों विदेश मंत्री बैठक में उपस्थित होंगे और इस बात की संभावनाएं हैं कि वो आपस में और अन्य नेताओं के साथ बातचीत करेंगे। हालांकि विदेश कार्यालय के प्रवक्ता डॉ मुहम्मद फैसल ने गुरुवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक बैठक का कोई कार्यक्रम नहीं है। एससीओ मंत्रिस्तरीय बैठक भारत में चुनाव के परिणामों की घोषणा से कुछ दिन पहले 21-22 मई को बिश्केक (किर्गिस्तान) में आयोजित की जा रही है।
किर्गिस्तान में होगी मुलाकात !
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी बैठक में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी। दोनों देशों के विदेश मंत्री तीन साल से अधिक समय तक नहीं मिले हैं। पिछले सितंबर में न्यूयॉर्क में आयोजित बैठक को भारत ने जम्मू-कश्मीर के पुलिसकर्मियों पर हमले और उनके परिवार के अपहरण के चलते रद्द कर दिया था।
इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त से मिले पाक विदेश सचिव
आपको बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध हाल ही में बहुत तनावपूर्ण रहे हैं। विदेश मंत्रियों की संभावित बैठक के बारे में अटकलें बुधवार को पाक सचिव सोहेल महमूद और इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया के बीच बैठक के बाद लगाई जाने लगी थीं। इस बैठक के बारे में पूछे जाने पर डॉ फैसल ने कहा, “इस तरह की बैठकें विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से होती हैं। विस्तृत एजेंडे का खुलासा नहीं किया जाए सकता।"
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