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पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण पीड़ितों में 75% पीड़ित हिंदू कन्याएं, यूएन की रिपोर्ट

Forced Conversion In Pakistan: पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के जबरन धर्मांतरण के मामले बढ़ते जा रहे हैं और यूएन ने भी इसे चिंता का विषय बताया है।

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भारत

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Tanay Mishra

Apr 24, 2026

Protest against forced conversion in Pakistan

Protest against forced conversion in Pakistan

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और निकाह के बढ़ते मामलों ने संयुक्त राष्ट्र को भी झकझोर दिया है। यूएन एक्सपर्ट्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में जबरन धर्मांतरण का शिकार हुई कुल लड़कियों में से 75% हिंदू समुदाय से थीं। एक्सपर्ट्स ने इसे एक 'निरंतर और व्यापक पैटर्न' करार दिया है। वहीँ 25% पीड़िताएं ईसाई थीं। सबसे प्रभावित क्षेत्र सिंध प्रांत बताया जा रहा है, जहाँ ऐसे 80% मामले देखने को मिले। रिपोर्ट में कहा गया है कि कानून का डर न होना और दोषियों को मिलने वाली छूट इस कुप्रथा को बढ़ावा दे रही है।

कानूनी कार्रवाई की मांग

यूएन ने पाकिस्तान में बढ़ते जबरन धर्मांतरण को चिंता का विषय बताया है। साथ ही पाकिस्तान सरकार से इस पर तत्काल संस्थागत और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

नाबालिगों को बनाया जा रहा निशाना

यूएन एक्सपर्ट्स ने खुलासा किया कि इस अपराध में मुख्य रूप से नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाया जाता है। इनमें 14-18 साल की लड़कियों की संख्या सबसे ज़्यादा है। हालांकि कुछ शिकार इससे भी छोटी उम्र की लड़कियों के हैं।

स्वतंत्र सहमति ज़रूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी धर्म परिवर्तन में ज़बरदस्ती नहीं होनी चाहिए। निकाह पूरी तरह से स्वतंत्र सहमति पर आधारित होना चाहिए। कानूनन एक बच्चा स्वतंत्र सहमति देने में सक्षम नहीं होता है। इन पीड़ितों को अक्सर शारीरिक और यौन शोषण, सामाजिक कलंक और गंभीर मानसिक आघात का सामना करना पड़ता है।

जबरन धर्मांतरण एक अलग अपराध के रूप में दर्ज हो

जबरन धर्मांतरण के मामले में जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मुख्य समस्या जांच में ढलाई और दोषियों को संरक्षण देना है। पुलिस अक्सर पीड़ित परिवारों की शिकायतों को खारिज कर देती है। कई मामलों में पीड़ित की सही उम्र का आकलन भी नहीं किया जाता। यूएन ने मांग की है कि जबरन धर्मांतरण को एक अलग अपराध के रूप में दर्ज किया जाए। साथ ही पूरे पाकिस्तान में विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाकर 18 वर्ष की जानी चाहिए।