-श्रद्धेय कर्पूरचंद्र कुलिश जयंती पर शहर के प्रबुद्धजनों ने अर्पित किए शब्द सुमन
पाली। कुलिश कलश थे ज्ञान के, वेदों के विद्वान, पत्रकारिता को दिया एक नूतन प्रतिमान... ये शब्द सुमन राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूरचंद्र कुलिश की जयंती पर शनिवार को शहर के प्रबुद्धजनों ने अर्पित किए। शहर के ज्योति विद्या मंदिर उच्च प्राथमिक विद्यालय में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने श्रद्धेय कुलिश को पत्रकारिता का पुरोधा बताते हुए सामाजिक सरोकारों में अग्रिणी बताया।
श्रद्धेय कुलिश की तस्वीर के समक्ष दीप जलाने के साथ शुरू गोष्ठी में साहित्यकार प्रमोद श्रीमाली ने कहा कि पत्रिका में खबरों का मसाल नहीं परोसा जाता है। उसमें विश्वसनीयता सर्वोपरि होती है। जो पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कुलिश के ध्येय व संकल्प का परिणाम है। वेद-विज्ञान पर श्रद्धेय कुलिश ने अनुकरणीय कार्य किया। जिसे शब्दों मेंं पिरोना मुश्किल है। कवयित्री तृप्ति चतुर्वेदी पाण्डेय ने कहा कि श्रद्धेय कुलिश ने जिन आदर्शों के साथ राजस्थान पत्रिका की स्थापना की थी। उन्हीं आदर्शों पर आज भी पत्रिका कायम है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के विभाग संयोजक पवन पाण्डेय ने कहा कि कुलिश का अर्थ वज्र है। इसी को साकार करते हुए श्रद्धेय कुलिश ने पत्रकारिता धर्म का निर्वहन किया और वहीं आदर्श उनकी पीढ़ी निभा रही है। यहीं कारण है कि आज भी विश्वसनीयता के मामले में पत्रिका का कोई सानी नहीं है।
विरले हैं कुलिश जैसी प्रतिभा
एडवोकेट अशोक अरोड़ा ने कहा कि श्रद्धेय कुलिश लेखक, कवि, साहित्यकार व दार्शनिक थे। उनके जैसे व्यक्तित्व विरले हैं। पत्रिका की जवाबदेहिता उनकी ही देन है। गायत्री परिवार के हरिगोपाल सोनी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके जयपुर में पत्रकारिता का कोर्स करते समय कभी-कभी कुलिशजी कॉलेज आते थे और पुत्र की भांति विद्यार्थियों को समझाते थे। कुलिशजी अपने आप में पूरा राजस्थान थे। उनकी लेखनी आज भी प्रेरित करती है।
सामाजिक सरोकारों में अग्रिणी
निजी शिक्षण संस्थान के जयशंकर त्रिवेदी ने कहा कि पत्रिका के सामाजिक सरोकार श्रद्धेय कुलिश की देन है। कृष्णकुमार शर्मा ने कहा कि निष्पक्ष समाचार जन-जन तक पहुंचाने का आगाज श्रद्धेय कुलिश ने किया था। गोष्ठी में रविन्द्र कुमार जोशी, प्रकाश पिड़वा, ममता शर्मा, भूपेन्द्रसिंह खेड़ा, अरविंद चतुर्वेदी, नरेन्द्र पटेल, प्रदीप दवे, शांति पटेल व प्रवीण पटेल ने कुलिशजी की लेखनी को निष्पक्ष बताते हुए उनके आदर्शों को प्रेरणास्रोत बताया।