
फाइल फोटो- पत्रिका
पाली। एक तरफ देशभर में गोसेवा और गोसंरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो इंसानियत को झकझोर देती हैं। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के नाम पर खेतों में छिपाकर रखे जा रहे पोटाश से भरे विस्फोटक गोले अब बेसहारा गोवंश की जान ले रहे हैं। भूख से भटकती गायें इन्हें चारे या आटे का गोला समझकर मुंह में दबाती हैं और अगले ही पल जोरदार धमाके के साथ उनका जबड़ा चिथड़े-चिथड़े हो जाता है। कई गोवंश दर्द से तड़पते हुए दम तोड़ रहे हैं।
यह वीडियो भी देखें
ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ किसान जंगली सुअरों, नीलगाय और अन्य जानवरों से फसल बचाने के लिए आटे या चारे के गोले बनाकर उनमें पोटाश जैसे विस्फोटकर पदार्थ भर देते हैं। इन्हें खेतों की मेड़, खाइयों और आसपास के इलाकों में रख दिया जाता है। यह तरीका न केवल अवैध है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है।
निराश्रित गोवंश जब इन्हें भोजन समझकर मुंह में लेता है तो दबाव पड़ते ही विस्फोट हो जाता है। धमाका इतना भीषण होता है कि गायों के ऊपरी और निचले जबड़े फट जाते हैं, जीभ कट जाती है और मुंह से अत्यधिक रक्तस्राव होने लगता है। कई मामलों में जबड़ा पूरी तरह नष्ट हो जाता है, जिससे घायल पशु न कुछ खा पाता है और न पानी पी पाता है। घावों में संक्रमण और कीड़े पड़ने से वे कई दिनों तक दर्द सहते हुए मौत के मुंह में समा जाते हैं।
मोहराई ग्राम पंचायत के समौखी गांव स्थित झालरा बेरा क्षेत्र में 18 मई को एक गोवंश खेत की खाई के पास रखे विस्फोटक की चपेट में आ गया। विस्फोट से उसका जबड़ा बुरी तरह फट गया। ग्रामीणों ने घायल गोवंश को उपचार के लिए बिलाड़ा अस्पताल पहुंचाया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया।
आनंदपुर कालू थाना क्षेत्र के बस्सी-नयागांव वन संरक्षित क्षेत्र में 15 मई को एक अन्य गोवंश विस्फोटक सामग्री खाने से गंभीर रूप से घायल हो गया। उपचार के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से पशुपालकों और ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है।
कामधेनु सेना भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर भड़ियासर ने कहा कि विस्फोटक पदार्थों का उपयोग कर बेजुबान जीवों को नुकसान पहुंचाना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि खुलेआम ऐसे विस्फोटकों का उपयोग गोवंश, वन्यजीवों और आमजन की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। उन्होंने विस्फोटक बेचने और खरीदने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। निमाज चौकी इंचार्ज रामकिशन ने बताया कि मामले की रिपोर्ट मिली है और ऐसे कृत्य में शामिल लोगों की तलाश की जा रही है।
मूक पशुओं के साथ हो रही यह क्रूरता समाज के माथे पर कलंक है। फसलों की सुरक्षा के नाम पर मौत का यह खेल किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हो सकता। पुलिस और प्रशासन को अवैध विस्फोटक रखने वालों और इसकी बिक्री करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को कानूनी और सुरक्षित विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि फसल भी सुरक्षित रहे और बेजुबान पशुओं की जिंदगी भी।
Updated on:
27 May 2026 03:53 pm
Published on:
27 May 2026 02:47 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
