पाली

दृष्टिहीन ‘ताज’ की रोशनी बनी ‘मुस्कान’, स्कूल से पहले बंटाती है पापा का हाथ

- रतौंधी के चलते आंखों की ताज मोहम्मद ने खोया आंखों का नूर तो 15 वर्षीय बेटी मुस्कान बनी सहारा
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Sep 28, 2018
Blind 'crown' lights 'smile', divides the father's hand before school
दृष्टिहीन ‘ताज’ की रोशनी बनी ‘मुस्कान’, स्कूल से पहले बंटाती है पापा का हाथ

महेश चन्देल
धनला (पाली) . मुस्कान, ये महज नाम नहीं वरन् एक नेत्रहीन पिता की आंखों की रोशनी है, तो बुढ़ापे का सहारा भी। जब वह हर रोज सूरज की पहली किरण के साथ अपने नेत्रहीन पिता को पीछे बैठाकर सरपट स्कूटी दौड़ाती है, तो हर कोई इस बिटिया पर गर्व किए बिना नहीं रह पाता। अपने नेत्रहीन पिता के अखबार सप्लाई के व्यवसाय में हाथ बंटाती इस बेटी की ओर हर किसी का ध्यान अनायास ही चला जाता है। ये बिटिया जोजावर ही नहीं, आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकी है। हम बात कर रहे हैं जोजावर गांव के 48 वर्षीय ताज मोहम्मद की बड़ी बेटी 15 वर्षीय मुस्कान की, जो वर्षों से अखबार बांटकर अपने परिवार का गुजारा कर रहे पिता के आंखों की रोशनी जाने के बाद पिता का सहारा बनकर काम में सहयोग कर रही है। 1990 से अखबार सप्लाई के काम में लगे ताज मोहम्मद ने बताया कि बचपन से उसे रतौंधी की बीमारी से चलते आंखों की रोशनी दिन-ब-दिन कम होती गई। सन 2000 में उसे दिखाई देना बंद हो गया। परिवार के मुखिया के नेत्रहीन होने पर पूरे परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट गया। पत्नी सलमा भी पति के काम में सहयोग करने लगी। ताज मोहम्मद के तीन बेटियां मुस्कान 15 वर्ष, आफ्रिना 12 वर्ष, अलवीरा 10 वर्ष तथा एक पुत्र अमन 7 वर्ष है। चारों भाई बहिनों में मुस्कान सबसे बड़ी है। पिता के आंखों की रोशनी खो जाने के बाद 15 वर्षीय मुस्कान से पिता की यह हालत देखी नहीं गई और परिवार का सहारा बनकर पिता के काम में हाथ बंटाने लगी। हर रोज सुबह जल्दी उठकर अपने पिता को स्कूटी पर बैठाकर घर-घर जाकर अखबार वितरण के कार्य में सहयोग कर रही हैं।

पढ़ाई भी चल रही साथ
पिता के कामकाज में हाथ बंटाने के साथ ही मुस्कान पढ़ाई भी कर रही है। अपने अन्य भाई बहनों की पढ़ाई का पूरा ख्याल रखती है। तीनों बहनें जोजावर के राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय में पढ़ती हैं। सात वर्षीय अमन निजी विद्यालय में पढ़ रहा है।

काम में हाथ बंटाने से लगता है अच्छा
बकौल मुस्कान मेरे पापा अखबार सप्लाई का काम करके परिवार का गुजारा करते हैं। आंखों से नहीं दिखता है। मैं उनकी मदद करती हूं। जहां भी जाना होता है स्कूटी पर बिठाकर ले जाती हूं। अखबार का भुगतान लेने घर-घर पापा के साथ जाती हूं। ताकि, मेरे पापा को परेशानी ना हो। इसके साथ पढ़ाई पर भी मेरा पूरा ध्यान है।

Updated on:
28 Sept 2018 11:25 am
Published on:
28 Sept 2018 11:22 am